विकास नंद/सर्वव्यापी
सरायपाली क्षेत्र की केना कृषि साख सहकारी समिति में सामने आए कथित केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) ऋण फर्जीवाड़े ने सहकारी बैंकिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक से तीन एकड़ भूमि वाले किसानों की जमीन का रकबा रिकॉर्ड में बढ़ाकर 20 से 25 एकड़ तक दर्शाया गया और उसी आधार पर उनके नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये का ऋण स्वीकृत कर निकाल लिया गया। हैरानी की बात यह है कि जिन किसानों के नाम पर ऋण लिया गया, उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी।मामला जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की तोरसिंहा शाखा से संबद्ध केना कृषि साख सहकारी समिति का बताया जा रहा है। किसानों का आरोप है कि समिति और बैंक के कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल अंजाम दिया गया। किसानों को उनके वास्तविक भूमि रकबे के आधार पर ऋण दिया गया, जबकि बढ़ाए गए रकबे के अनुसार स्वीकृत अतिरिक्त ऋण राशि का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया।ऐसे खुला फर्जीवाड़े का राजजानकारी के अनुसार वर्ष 2024 में कुछ किसान पुराने ऋण का भुगतान करने और नया ऋण लेने सहकारी बैंक पहुंचे। वहां उन्हें अपने खातों में दर्ज भूमि रकबे और ऋण राशि में भारी अंतर दिखाई दिया। जांच कराने पर पता चला कि उनके नाम पर लाखों रुपये का अतिरिक्त ऋण दर्ज है, जबकि उन्होंने इतना ऋण कभी लिया ही नहीं था।जब इन किसानों ने अन्य किसानों से चर्चा की तो कई और खातों में इसी तरह की गड़बड़ियां सामने आईं। इसके बाद किसानों को संदेह हुआ कि उनके दस्तावेजों और रिकॉर्ड का उपयोग कर फर्जी तरीके से ऋण निकाला गया है। मामले की शिकायत प्रशासन और बैंक अधिकारियों से की गई।
जांच के घेरे में समिति और बैंक के अधिकारी
शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि फर्जीवाड़े में सहकारी समिति और बैंक शाखा के तत्कालीन एवं वर्तमान अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका हो सकती है। किसानों का कहना है कि भूमि रिकॉर्ड में बदलाव और ऋण स्वीकृति जैसी प्रक्रियाएं बिना अधिकारियों की जानकारी और सहभागिता के संभव नहीं हैं। हालांकि आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देशमामला सामने आने के बाद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने इसे गंभीरता से लेते हुए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सरायपाली को जांच के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने कहा कि मामला मीडिया के माध्यम से संज्ञान में आया है और इसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बड़े खुलासों की उम्मीद
ग्रामीणों और किसानों का मानना है कि यदि निष्पक्ष और गहन जांच कराई गई तो केवल केसीसी ऋण फर्जीवाड़ा ही नहीं, बल्कि सहकारी समितियों में वर्षों से चली आ रही अन्य अनियमितताएं भी उजागर हो सकती हैं। फिलहाल प्रभावित किसानों की नजरें प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई हैं और वे दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसानों के नाम पर निकाले गए करोड़ों रुपये के ऋण की जिम्मेदारी आखिर किसकी है और इस कथित घोटाले में शामिल लोगों पर कब कार्रवाई होगी? इसका जवाब जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मिल सकेगा।
बहरहाल रिकॉर्ड में बढ़ाया गया किसानों की जमीन का रकबा, बिना जानकारी लाखों का कर्ज चढ़ा; प्रशासनिक जांच से खुल सकते हैं कई बड़े राज