तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

बिलासपुर जिले के बोदरी तहसील अंतर्गत ग्राम लिमतरी निवासी गोरे लाल कौशिक द्वारा भूमि सीमांकन एवं दर्ज आपत्ति के निराकरण में हो रही लगातार देरी को लेकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले में बिलासपुर संभाग के आयुक्त सुनील जैन ने गंभीरता दिखाते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल को तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।जानकारी के अनुसार ग्राम लिमतरी, तहसील बोदरी निवासी गोरे लाल कौशिक वर्ष 2021 से अपनी पैतृक भूमि के सीमांकन के लिए राजस्व विभाग के समक्ष लगातार आवेदन प्रस्तुत कर रहे हैं। प्रकरण कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचने के बाद कलेक्टर संजय अग्रवाल ने 03 मार्च 2026 को तहसील बोदरी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके पूर्व तहसीलदार बोदरी द्वारा 17 अक्टूबर 2025 को जांच समिति का गठन भी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद अब तक न तो भूमि का सीमांकन किया गया और न ही मामले का अंतिम निराकरण हो सका है।आवेदक का आरोप है कि हल्का पटवारी क्रमांक 29 द्वारा उनके भाई मुन्ना कौशिक की ओर से दर्ज कराई गई आपत्ति का हवाला देकर सीमांकन प्रक्रिया को लंबित रखा गया है। जबकि उक्त आपत्ति के संबंध में भी आज तक कोई सक्षम आदेश पारित नहीं किया गया है। इससे आवेदक को लगातार मानसिक, आर्थिक एवं पारिवारिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।गोरे लाल कौशिक ने अपने आवेदन में कहा है कि प्रशासनिक स्तर पर बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद राजस्व अधिकारियों द्वारा मामले का समाधान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कलेक्टर से निष्पक्ष जांच कर शीघ्र सीमांकन कराने, दर्ज आपत्ति का समयबद्ध निराकरण करने तथा पूर्व आदेशों के पालन में हुई देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।मामले की गंभीरता को देखते हुए संभाग आयुक्त सुनील जैन ने कलेक्टर संजय अग्रवाल को प्रकरण में तत्काल हस्तक्षेप कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयुक्त के निर्देश के बाद अब संबंधित राजस्व अधिकारियों की कार्यप्रणाली और लंबित प्रकरण के शीघ्र निराकरण पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।प्रमुख सवाल यही है कि वर्ष 2021 से लंबित सीमांकन का कार्य अब तक क्यों नहीं हुआ? कलेक्टर के निर्देशों के बाद भी कार्रवाई में देरी के लिए कौन जिम्मेदार है? दर्ज आपत्ति का निराकरण किए बिना प्रकरण को लंबित रखने का आधार क्या है?क्या संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी? स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि प्रशासनिक आदेशों का समय पर पालन नहीं होता है तो आम लोगों का शासन-प्रशासन पर विश्वास प्रभावित होता है। ऐसे में संभाग आयुक्त के हस्तक्षेप के बाद मामले के शीघ्र समाधान की उम्मीद बढ़ गई है।