सुबोध कुमार सिंह की रणनीति का असर: हैदराबाद इन्वेस्टर कनेक्ट में छत्तीसगढ़ को मिले 9,580 करोड़ के निवेश प्रस्ताव।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख निवेश गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह की रणनीतिक सोच और सतत प्रयासों का प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। हैदराबाद में आयोजित ‘छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट’ कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों की सात बड़ी कंपनियों ने प्रदेश में 9,580 करोड़ रुपये के निवेश की इच्छा जताई है, जिससे 7,800 से अधिक रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है।राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों तक पहुंचाने की जो व्यापक रणनीति तैयार की गई है, उसके प्रमुख सूत्रधारों में सुबोध कुमार सिंह की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, जापान और दक्षिण कोरिया के बाद हैदराबाद में आयोजित यह निवेशक सम्मेलन भी उसी दीर्घकालिक रोडमैप का हिस्सा रहा, जिसके तहत छत्तीसगढ़ को उद्योग, तकनीक और नवाचार का नया केंद्र बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में निवेशकों को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ विकसित भारत के ग्रोथ इंजन के रूप में तेजी से उभर रहा है और राज्य सरकार ने निवेशकों के लिए रेड कारपेट बिछा रखा है। लेकिन प्रशासनिक हलकों में इस बात की चर्चा है कि निवेशकों के साथ लगातार संवाद, औद्योगिक नीतियों का सरलीकरण, सिंगल विंडो सिस्टम की मजबूती और विभिन्न निवेशक सम्मेलनों की श्रृंखला के पीछे प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह की सक्रिय रणनीतिक भूमिका रही है।हैदराबाद सम्मेलन में प्राप्त निवेश प्रस्तावों में सबसे बड़ा निवेश 4,200 करोड़ रुपये का है, जिसके तहत भारत का पहला समर्पित डिजास्टर रिकवरी डेटा सेंटर कैंपस स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा सीमेंट, सेमीकंडक्टर, एआई एवं जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर, सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण, वस्त्र उद्योग, फार्मास्यूटिकल्स और डेयरी प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में भी बड़े निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। यह दर्शाता है कि राज्य अब केवल खनिज आधारित उद्योगों तक सीमित नहीं रहकर नई अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में भी निवेश आकर्षित कर रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि सुबोध कुमार सिंह द्वारा तैयार की गई निवेश प्रोत्साहन रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि छत्तीसगढ़ को केवल संसाधन सम्पन्न राज्य के रूप में नहीं, बल्कि डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे भविष्य के उद्योगों के लिए उपयुक्त गंतव्य के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। यही कारण है कि निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।हैदराबाद प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री और राज्य के प्रतिनिधिमंडल की देश की अग्रणी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठकों को भी इसी रणनीतिक पहल का हिस्सा माना जा रहा है। निवेशकों के समक्ष राज्य की औद्योगिक क्षमताओं, लॉजिस्टिक सुविधाओं, ऊर्जा उपलब्धता और उद्योग-अनुकूल प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चल रहे निवेश अभियान को धरातल पर उतारने के लिए प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह ने विभागों के बीच बेहतर समन्वय, त्वरित निर्णय प्रक्रिया और निवेशकों की समस्याओं के त्वरित समाधान पर विशेष जोर दिया है। यही कारण है कि नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद राज्य को अब तक 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं।हैदराबाद में मिले नए निवेश प्रस्तावों ने यह संकेत दे दिया है कि छत्तीसगढ़ अब केवल प्राकृतिक संसाधनों का प्रदेश नहीं, बल्कि निवेश, नवाचार और रोजगार सृजन का उभरता हुआ राष्ट्रीय केंद्र बन रहा है। इस उपलब्धि के पीछे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह की प्रशासनिक रणनीति का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।


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