नूर मोहम्मद, गौरेला पेंड्रा मरवाही (सर्वव्यापी)
जिला मुख्यालय स्थित गुरुकुल परिसर का विशाल खेल मैदान इन दिनों प्रशासनिक उदासीनता का शिकार बना हुआ है। शाम ढलते ही पूरा मैदान अंधेरे की चपेट में आ जाता है, जिससे यहां प्रतिदिन आने वाले सैकड़ों लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग, महिलाएं, खिलाड़ी और सेना, पुलिस, वन विभाग सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की शारीरिक तैयारी करने वाले युवा अंधेरे में ही अपनी गतिविधियां करने को मजबूर हैं। हैरानी की बात यह है कि मैदान में प्रकाश व्यवस्था के लिए पर्याप्त लाइटें लगी हुई हैं, लेकिन उनका नियमित संचालन और रखरखाव नहीं होने के कारण वे शोपीस बनकर रह गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मौजूद लाइटों को नियमित रूप से चालू कराया जाए और उनका रखरखाव किया जाए तो मैदान पूरी तरह रोशन हो सकता है। स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसी परिसर में लगभग 250 सीटर छात्रावास भी संचालित है तथा यह स्थान जिला मुख्यालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय और अन्य महत्वपूर्ण शासकीय कार्यालयों से कुछ ही दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग और नगर पालिका की उदासीनता समझ से परे है।स्थानीय नागरिकों ने एक दर्दनाक घटना को याद करते हुए बताया कि कुछ वर्ष पूर्व इसी परिसर में एक मासूम बच्चे को जहरीले कीड़े ने काट लिया था, जिसके बाद वह कोमा में चला गया और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। इसके बावजूद सुरक्षा और प्रकाश व्यवस्था को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।नागरिकों का कहना है कि अंधेरे के कारण कभी भी कोई अप्रिय घटना, दुर्घटना या आपराधिक वारदात हो सकती है। सवाल यह उठता है कि जब मैदान में पहले से लाइट की व्यवस्था मौजूद है तो आखिर उसे चालू रखने में क्या बाधा है शहरवासियों ने जिला प्रशासन, नगर पालिका और संबंधित विभाग से मांग की है कि गुरुकुल मैदान की प्रकाश व्यवस्था तत्काल बहाल की जाए, ताकि खिलाड़ी, छात्र, महिलाएं और बुजुर्ग सुरक्षित वातावरण में अपनी दैनिक गतिविधियां कर सकें। जनता का सवालक्या प्रशासन किसी बड़ी घटना के बाद ही जागेगा, या फिर समय रहते गुरुकुल मैदान को अंधेरे से मुक्त कराया जाएगा?