
कुछ रिश्ते वक्त के साथ पुराने नहीं होते, बल्कि और भी गहरे हो जाते हैं। ऐसी ही दोस्ती और यादों का खूबसूरत संगम देखने को मिला जब बी एस सी 1994 बैच , महासमुंद के कॉलेज साथियों ने 32 साल बाद एक बार फिर मिलकर रियूनियन समारोह मनाया।कभी कॉलेज की गलियों में सपनों के साथ कदम रखने वाले ये दोस्त आज जीवन के अलग-अलग मुकाम पर पहुंच चुके हैं, लेकिन दिलों में वही अपनापन और दोस्ती की मिठास आज भी कायम है। वर्षों बाद जब सभी साथी मिले तो लगा जैसे समय ने फिर से 1994 के उस दौर को जीवंत कर दिया।महासमुंद की धरती पर रियूनियन में पहुंचे सहपाठियों का स्वागत ग्रुप के सदस्यों ने ढोल-नगाड़ों के साथ किया। फूलों की माला, तिलक और हैंड बैंड पहनाकर साथियों का आत्मीय अभिनंदन किया गया। स्वागत के इस पल ने सभी के चेहरों पर पुरानी यादों वाली मुस्कान बिखेर दी।रिफ्रेशमेंट के बाद परिचय का दौर शुरू हुआ। सभी साथियों ने अपने जीवन के सफर, उपलब्धियों और परिवार के बारे में अनुभव साझा किए। किसी ने अपनी यादें सुनाईं तो किसी ने पुराने दिनों की शरारतों को याद कर माहौल को भावुक और खुशनुमा बना दिया।इसके बाद सभी साथियों ने अपने पुराने कॉलेज भवन, लोहानी बिल्डिंग का भ्रमण किया। वही कक्षाएं, वही गलियां और वही परिसर 32 साल पुरानी यादों को फिर से ताजा कर गए। पुराने कॉलेज भवन के सामने ग्रुप फोटो सेशन हुआ, जिसमें दोस्ती और यादों के अनमोल पल कैमरे में कैद हुए।दोपहर के भोजन के बाद शुरू हुआ मस्ती और उत्साह का दौर। गीत, कविता, डांस और विभिन्न ग्रुप खेलों ने पूरे वातावरण को आनंद और उल्लास से भर दिया। वर्षों बाद मिले दोस्तों ने उम्र के पड़ाव को पीछे छोड़कर फिर वही कॉलेज जीवन वाली ऊर्जा महसूस की।शाम को डिनर के साथ इस यादगार मिलन समारोह का समापन हुआ। सभी साथियों ने एक-दूसरे को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं और ऐसे मिलन को आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया।इस अवसर पर सभी ने अपने आदरणीय शिक्षकों को भी याद किया और उनके मार्गदर्शन एवं योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। साथियों ने कहा कि शिक्षकों के संस्कार और सीख ने जीवन को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रियूनियन कुछ छुटे हुए साथियों को भी याद करने का अवसर था।32 साल बाद हुई यह मुलाकात सिर्फ एक रियूनियन नहीं, बल्कि दोस्ती, यादों और रिश्तों को फिर से महसूस करने का एक खूबसूरत अवसर था।यह दिन सभी साथियों के जीवन में हमेशा एक यादगार अध्याय बनकर रहेगा।