तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ में अवैध खनन और खनिज परिवहन के विरुद्ध चल रही कार्रवाई इन दिनों व्यापक चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रशासन और खनिज विभाग द्वारा लगातार की जा रही जांच, जब्ती और कार्रवाई के बाद यह माना जा रहा है कि राज्य सरकार ने अवैध खनन गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए अपनी रणनीति को और अधिक आक्रामक बनाया है। राजनीतिक गलियारों से लेकर आम नागरिकों तक, इस बात की चर्चा है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सचिव पी. दयानंद को खनिज विभाग की जिम्मेदारी मिलने के बाद विभागीय गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली है।प्रदेश के अनेक जिलों में अवैध रेत उत्खनन, पत्थर खदानों में अनियमित संचालन, बिना अनुमति खनिज परिवहन तथा राजस्व हानि से जुड़े मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर कई स्थानों पर खनिज विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीमों द्वारा छापामार कार्रवाई की गई है, जिसके बाद अवैध खनन से जुड़े नेटवर्क पर दबाव बढ़ने की बात कही जा रही है।राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में नागरिकों और सामाजिक संगठनों के बीच यह धारणा भी व्यक्त की जा रही है कि पिछले कई वर्षों में पहली बार अवैध खनन गतिविधियों के खिलाफ इतने व्यापक स्तर पर कार्रवाई देखने को मिल रही है। हालांकि, इन दावों पर आधिकारिक रूप से कोई तुलनात्मक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन लगातार हो रही कार्रवाई ने इस विषय को राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।विश्लेषकों का मानना है कि खनिज क्षेत्र किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण न केवल राजस्व वृद्धि में सहायक होता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है। यही कारण है कि राज्य सरकार द्वारा इस क्षेत्र में दिखाई जा रही सक्रियता को प्रशासनिक दृढ़ता के रूप में भी देखा जा रहा है।राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यदि अवैध खनन के विरुद्ध यह अभियान लगातार और निष्पक्ष रूप से जारी रहता है, तो इसका प्रभाव केवल राजस्व संग्रह तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शासन-प्रशासन की कार्यशैली को लेकर जनता के बीच सकारात्मक संदेश भी जाएगा। वहीं, विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से भी समय-समय पर यह मांग उठती रही है कि अवैध खनन के मामलों में कार्रवाई बिना किसी भेदभाव के की जानी चाहिए।प्रदेश के कई हिस्सों में चल रही कार्रवाई के बाद यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि खनिज क्षेत्र में नियमों के उल्लंघन को लेकर प्रशासन अब पहले की तुलना में अधिक सतर्क और सक्रिय नजर आ रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अवैध खनन के विरुद्ध चल रहा यह अभियान किस स्तर तक प्रभावी साबित होता है और राज्य सरकार इस दिशा में कौन-कौन से नए कदम उठाती है।फिलहाल, छत्तीसगढ़ में खनिज माफियाओं के विरुद्ध जारी कार्रवाई और प्रशासनिक सक्रियता जनचर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है तथा इसे राज्य की प्रशासनिक कार्यशैली में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।