बिलासपुर/ तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ प्रदेश के नगर सैनिकों जिसे होमगार्ड के नाम से जाने जाते हैं,वह आज सभी सरकारी कर्मचारियों से अलग हटकर काम करते हैं लेकिन इनकी उपेक्षा छत्तीसगढ़ स्थापना के बाद भी खत्म नहीं हुई और आज भी इनका उपेक्षा जारी है। छत्तीसगढ़ के होमगार्ड यानि कि नगर सेना के जवान एक बंधुवा मजदूर की भांति काम कर रहे हैं जो अपने मान-सम्मान के लिए भी खुलकर नहीं लड़ पा रहे हैं,भले ही नगर सैनिकों की आड़ में उच्च अधिकारियों द्वारा जमकर घोटाले किए जा रहे हैं,जो जांच का विषय है लेकिन आज छत्तीसगढ़ के नगर सेना के जवान न केवल पुलिस थानों के कामकाज, दफ्तरों और अफसरों के बंगलों में सेवाएं दे रहे हैं, बल्कि कानून व्यवस्था, व्हीआईपी ड्यूटी,आपदाओं और बड़ी घटनाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन इसके बाद भी इन्हें पुलिस की भांति न तो वेतन मिल रहा है और न ही मान सम्मान..!छत्तीसगढ़ में नगर सैनिकों के वेतन को लेकर कई बार सवाल खड़े हो चुके हैं। उनकी सर्विस का रुल और नियम कायदे पुलिस विभाग की तरह हैं। भर्ती का सिस्टम भी लगभग वही है। थानों में नगर सैनिक पुलिस जवानों की तरह ही सारी जिम्मेदारी निभाते हैं। इसके बावजूद सिपाहियों और नगर सैनिकों के वेतन में बड़ा अंतर है। इसमें नगर सैनिकों को पुलिस विभाग के आरक्षक के बराबर वेतन, मानदेय, डीए, ड्यूटी एलाउंस सहित अन्य सुविधाएं देने की मांग करते आ रहे हैं परंतु इन्हें कोई सुविधा नहीं मिल पा रहा है और यह एक बंधुवा मजदूर की तरह काम करने मजबूर हैं । निश्चित रूप से आज छत्तीसगढ़ की नगर सेना के जवान पूरी तरह से उपेक्षित है और न जाने इनकी उपेक्षा को राज्य की वर्तमान विष्णु देव साय की सरकार खत्म कर पाती है या नहीं..?