कबीरधाम/ धनंजय साहू / ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार में आज विभिन्न निगम, मंडल,आयोग,बोर्ड में संशोधन आदेश जारी किया गया है। जिससे संभावना जताई जा रही है कि अब जल्द ही शेष बचे निगम, मंडल, आयोग,बोर्ड में नियुक्ति की जाएगी। वहीं सबसे बड़ी सवाल यह खड़ा हो रहा है कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में राजभाषा छत्तीसगढ़ी को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में नियुक्ति नहीं हुई और भाजपा विपक्ष की भूमिका में रहते हुए कांग्रेस की तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को हमेशा घेरते रहे हैं लेकिन अब सत्ता में आने के बाद भाजपा की विष्णु सरकार में अब तक छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में किसी की नियुक्ति न होना बड़े ही चिंता का विषय बताया जा रहा है। बताते चलें कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ी भाषा को राजभाषा का दर्जा मिला था और इनके बढ़ावा को लेकर छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का गठन भी किया गया था। जिसमें अध्यक्ष, सदस्य के पद पर छत्तीसगढ़ी भाषा की जानकार एवं पत्रकारों, साहित्यकारों को इस आयोग में नियुक्ति करने का प्रावधान बनाया गया है और डॉ रमन सिंह के कार्यकाल में इस आयोग में उम्रदराज साहित्यकारों को अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई,मजे कि बात यह है कि इस आयोग में अब तक ब्राह्मण समाज से ही अध्यक्ष बनाए गये। जो आयोग के पैसों से खुद की किताबों का प्रकाशन कराते रहे हैं और राजभाषा छत्तीसगढ़ी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में कोई रुचि नहीं दिखाए। जिसके कारण आज छत्तीसगढ़ी भाषा का महत्व दूसरे प्रदेशों में नहीं बल्कि खुद छत्तीसगढ़ प्रदेश में छत्तीसगढ़ी भाषा का महत्व खत्म होते नजर आ रहा है। वहीं इस बार भी इस आयोग में अध्यक्ष पद पर लगभग दर्जन भर ब्राह्मण समाज के वरिष्ठ उम्रदराज साहित्यकार दावेदारी कर रहे हैं तो एक दो युवा पत्रकार, साहित्यकार बंधु अध्यक्ष के दावेदार हैं जो ओबीसी वर्ग से हैं लेकिन उनकी राजनीतिक पहुंच न होने के कारण कोई नियुक्ति नहीं हो रही है और माना जा रहा है कि इस बार फिर ब्राम्हण समाज से ही अध्यक्ष की नियुक्ति की जाएगी। वहीं छत्तीसगढ़ शासन के रमन सरकार में मंत्री रह चुके डॉ कृष्ण मूर्ति बांधी ने अपने एक समर्थक को छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में नियुक्ति करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को बीते दिनों ही ज्ञापन सौंपा है। देखना है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रमन सरकार के पूर्व मंत्री डॉ बांधी की मांग को गंभीरता से लेते हुए उनके समर्थक को अध्यक्ष बनाते हैं या फिर उम्रदराज साहित्यकारों को जिम्मेदारी देते हैं। ——–//——-
-मुख्यमंत्री सचिवालय से फाइल गायब वहीं विभागीय सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम पर उनके प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह को एक वरिष्ठ पत्रकार ने छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति को लेकर मांग पत्र सौंपा गया था। जिस पर मुख्यमंत्री के पीएस सुबोध कुमार सिंह ने उप सचिव सूरज साहू को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिए थे और सूरज साहू ने मुख्यमंत्री सचिवालय सेक्शन को आदेश पर आवश्यक कार्रवाई करने भेजा था लेकिन संबंधित वरिष्ठ पत्रकार द्वारा पता लगाने पर मुख्यमंत्री सचिवालय के सेक्शन यह मांग पत्र ही गायब हैं,भले ही संबंधित अफसरों के निज स्थापना के अधिकारियों ने आवक-जावक चढ़ाया है लेकिन सेक्शन से फाइल गायब होना बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। जिस पर मुख्यमंत्री पीएस सुबोध कुमार सिंह को सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता है।