विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों की दी जा रही जानकारी….दो सौ से अधिक गांवों में पहुंची कृषि रथ।

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विकास नंद/ सर्वव्यापी/

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के “विकसित कृषि संकल्प अभियान” की संकल्पना को साकार करने एवं किसान, अनुसंधान और विज्ञान को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से जिले में “विकसित कृषि संकल्प अभियान” चलाया जा रहा है। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देशानुसार 3 कृषि वैज्ञानिकों की टीम गठित की गई है। यह टीम 29 मई से प्रतिदिन जिले के 3 क्लस्टर गांवों में जाकर खरीफ 2025 में लगाई जाने वाली फसलों की उन्नत काश्त तकनीकों की जानकारी किसानों को दे रही है। आज दिनांक तक 30 क्लस्टर अंतर्गत 240 गांवों तक कृषि रथ पहुंचकर किसानों को नवीनतम तकनीक, फसल चक्र परिवर्तन एवं उन्नत बीज के बारे में जानकारी दे रहे हैं। साथ ही नवोन्वेषी किसानों द्वारा जानकारी साझा किया जा रहा है। अब तक जिले के महासमुंद, बागबाहरा, पिथौरा एवं सरायपाली विकासखंड के 30 क्लस्टरों में कार्यक्रम आयोजित हो चुके हैं। इनमें झालखम्हरिया, खट्टी, किशनपुर, टेंका, गेर्रा, छिबर्रा, हाथीबाहरा, टेका, परसवानी, रिखादादर, केदवा, जम्हारी, सिरपुर, छपोराडीह, पिरदा, लिमदरहा, सिंघोड़ा, कलेण्डा, पाली, बावनकेरा, कसहीबाहरा, कोकोभाठा, डूमरपाली, अंतरझोला, बिरकोनी, बेलसोंडा, खुटेरी, बगारपाली, किसड़ी एवं अर्जुंडा शामिल हैं। इन कार्यक्रमों में अब तक 36 क्लस्टर अंतर्गत 240 गांवों के लगभग 2000 से अधिक किसान शामिल हो चुके हैं और कृषक वैज्ञानिक परिचर्चा में भाग ले चुके हैं। इन शिविरों में स्थानीय जनप्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं। विकसित कृषि संकल्प अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को खरीफ फसलों हेतु वैज्ञानिक तकनीकी सुझाव प्रदान करना, नवीनतम कृषि तकनीकों का प्रसार करना, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार संतुलित उर्वरक उपयोग पर जागरूकता बढ़ाना, उन्नत कृषि यंत्रों जैसे सीड ड्रिल, प्लांटर मशीन, पैडी ट्रांसप्लांटर, ब्रॉड बेड फरो मशीन का उपयोग बढ़ाना, ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन, समन्वित कृषि प्रणाली, बीज उपचार, जल संरक्षण, समन्वित कीट प्रबंधन, किसान क्रेडिट कार्ड, फसल चक्र परिवर्तन और लाभदायक फसलों के बारे में जानकारी देना है। साथ ही कृषि एवं संबद्ध विभागों की योजनाओं की जानकारी भी किसानों को दी जा रही है।’ग्रामों के प्रगतिशील किसान भी इस दौरान अपने अनुभव साझा कर रहे हैं और दूसरों को नवीनतम कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। ग्राम व क्षेत्र के जनप्रतिनिधिगण भी इस अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाते हुए किसानों को जागरूक कर रहे हैं। उप संचालक कृषि एफ. आर. कश्यप ने बताया कि इस अभियान के दौरान कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों द्वारा किसानों से फीडबैक भी लिया जा रहा है। यह फीडबैक पारंपरिक ज्ञान, नवाचारों और अनुभवों पर आधारित होगा, जिसे अनुसंधान संस्थानों में और अधिक अध्ययन कर खेती को जलवायु परिवर्तन के बीच लाभप्रद व टिकाऊ बनाने के लिए उपयोग किया जाएगा।


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