स्वतंत्रता दिवस से पहले प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल, राष्ट्रीय ध्वज का हुआ अपमान।

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तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले बिलासपुर संभाग के कोरबा जिले में घटी एक घटना ने न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीक के सम्मान पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 15 अगस्त की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे एसपी सिद्धार्थ तिवारी और कलेक्टर अजीत वसंत के साथ सीडल ग्राउंड पर हुई निरीक्षण यात्रा के दौरान, एसपी की आधिकारिक गाड़ी के आगे लगा तिरंगा उल्टा पाया गया।मौके पर मौजूद लोगों ने जब यह नजारा देखा, तो हैरानी के साथ नाराज़गी भी जाहिर की। राष्ट्रीय ध्वज का उल्टा प्रदर्शन न केवल भारत के ध्वज संहिता का खुला उल्लंघन है, बल्कि यह राष्ट्रीय सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य भी है।भारत के ध्वज संहिता के अनुसार, तिरंगे का केसरिया रंग हमेशा ऊपर और हरा रंग नीचे होना चाहिए, जबकि अशोक चक्र बीच में स्पष्ट रूप से दिखना चाहिए। उल्टा ध्वज राष्ट्रीय अपमान की श्रेणी में आता है, जिसके लिए कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।लोगों के बीच चर्चा का विषय यही रहा कि यह घटना महज़ एक भूल थी या फिर राष्ट्रीय प्रतीक के प्रति संवेदनहीनता का परिणाम। सवाल यह भी उठ रहा है कि जो अधिकारी राष्ट्रध्वज के साथ सही व्यवहार का पालन नहीं कर पा रहे, वे आम नागरिकों को कैसे जागरूक करेंगे?घटना सामने आते ही सोशल मीडिया पर नागरिकों ने नाराज़गी जताई और जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ तत्काल जांच व कार्रवाई की मांग की। कई यूज़र्स ने लिखा कि तिरंगा सिर्फ़ औपचारिक आयोजन का हिस्सा नहीं, बल्कि देश की आत्मा है।जब पूरा देश 15 अगस्त की तैयारियों में जुटा है और तिरंगे के नीचे एकजुटता का संदेश दे रहा है, उस समय इस तरह की लापरवाही विशेष रूप से चिंताजनक है। प्रशासन के लिए यह एक चेतावनी है कि राष्ट्रध्वज के सम्मान के मामलों में शून्य सहनशीलता अपनाई जाए। वहीं यह पहली बार नहीं है। पूर्व में भी राजनीतिक रैलियों, सरकारी कार्यक्रमों और खेल आयोजनों में उल्टा तिरंगा लगाने या ध्वज संहिता तोड़ने की घटनाएं सामने आई हैं। लेकिन जब यह गलती प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हो, तो इसकी गंभीरता और भी बढ़ जाती है।तिरंगा केवल कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि यह भारत की अस्मिता, एकता और बलिदान की विरासत का प्रतीक है। इसे उल्टा फहराना या गलत तरीके से लगाना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं। कोरबा की यह घटना स्पष्ट संदेश देती है कि राष्ट्रीय सम्मान के मामले में जागरूकता, प्रशिक्षण और जवाबदेही की सख्त जरूरत है।


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