नूर मोहम्मद/ गौरेला पेंड्रा मरवाही/(सर्वव्यापी)
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को लेकर सरकार चाहे जितने दावे कर ले, लेकिन सारबहरा,गौरेला स्थित 6 बिस्तरीय अतिरिक्त कक्ष उप-स्वास्थ्य केंद्र उन दावों की जमीनी पोल खोलता नजर आ रहा है। करोड़ों नहीं तो लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया यह स्वास्थ्य केंद्र आज ताले, सन्नाटा और झाड़-झंखाड़ का पर्याय बन चुका है।
*भवन है,बिस्तर हैं… पर मरीज के लिए दरवाज़ा बंद*
जिस केंद्र का उद्देश्य था कि ग्रामीणों को प्रसूति, आपात उपचार और भर्ती सुविधा गांव में ही मिले, वह केंद्र व्यवहार में बंद पड़ा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि -> “बीमारी में आज भी मरीजों को गौरेला या पेंड्रा ले जाना मजबूरी है, यहां सिर्फ़ बोर्ड लगा है।”अगर 6 बिस्तरीय सुविधा वास्तव में चालू होती, तो न केवल ग्रामीणों को राहत मिलती, बल्कि मातृ-शिशु मृत्यु जैसी घटनाओं पर भी रोक लग सकती थी।
बड़ा सवाल: संचालन क्यों नहीं?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भवन तैयार था,बिस्तरीय सुविधा स्वीकृत थी, तो डॉक्टर, एएनएम और स्टाफ की पदस्थापना क्यों नहीं की गई?क्या निर्माण केवल फाइलों में उपलब्धि दर्ज कराने के लिए किया गया?
खर्च दिखा, सेवा नहीं
स्वास्थ्य विभाग द्वारा अतिरिक्त कक्ष निर्माण पर सरकारी राशि खर्च की गई, लेकिन न निगरानी दिखी, न जवाबदेही। यह स्थिति साफ इशारा करती है कि योजना और अमल के बीच गंभीर खाई है।
प्रश्न यह भी उठता है कि -> क्या निर्माण के बाद संचालन की कोई ठोस कार्ययोजना थी या नहीं?और अगर थी, तो वह लागू क्यों नहीं हुई?
जवाबदेही किसकी?
क्या यह लापरवाही स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन की है?जिला स्वास्थ्य विभाग की?या फिर निगरानी तंत्र की विफलता?ग्रामीणों की मांग है कि इस पूरे मामले की प्रशासनिक जांच हो और यह स्पष्ट किया जाए कि ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधा को शो-पीस बनाने का जिम्मेदार कौन है।
सरकार की मंशा पर असर
सरकार की मंशा ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की है, लेकिन सारबहरा उप-स्वास्थ्य केंद्र जैसी स्थिति न केवल योजनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है, बल्कि आमजन के भरोसे को भी कमजोर करती है।
जब तक स्वास्थ्य केंद्रों को सिर्फ़ ईंट-सीमेंट की संरचना समझकर नहीं, बल्कि सक्रिय सेवा इकाई के रूप में संचालित नहीं किया जाएगा, तब तक ग्रामीण स्वास्थ्य सुधार महज़ घोषणा बनकर रह जाएगा। सारबहरा का यह 6 बिस्तरीय उप-स्वास्थ्य केंद्र आज सरकार की नीयत नहीं,बल्कि प्रशासनिक उदासीनता की पहचान बनता जा रहा है।