तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ के नवनिर्मित विधानसभा भवन में चल रहे विधानसभा सत्र का आज दूसरा दिन सत्ता पक्ष के लिए असहज करने वाला साबित हो रहा है। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ भाजपा विधायक अजय चंद्राकर सत्र के हर अहम मुद्दे पर अपनी ही सरकार के मंत्रियों को कठघरे में खड़ा करते नजर आ रहे हैं। प्रश्नकाल से लेकर चर्चा के दौरान तक उनकी तीखी टिप्पणियां और तथ्यात्मक सवाल सरकार के भीतर ही गंभीर बहस का कारण बन गए हैं।अजय चंद्राकर ने विकास योजनाओं की प्रगति, प्रशासनिक निर्णयों की पारदर्शिता और जनहित से जुड़े मामलों पर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगे। उन्होंने न केवल आंकड़ों और दस्तावेजों के साथ मंत्रियों से सवाल किए, बल्कि यह भी संकेत दिया कि सत्ता में आने के बाद वादों और जमीनी हकीकत के बीच खाई लगातार बढ़ रही है। उनके तेवर यह दर्शा रहे थे कि वे विपक्ष की भूमिका में नहीं, बल्कि सरकार को आत्ममंथन के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से सदन में मुखर हैं।सत्र के दौरान कई अवसरों पर मंत्री जवाब देने में असहज दिखाई दिए। कुछ मामलों में उन्हें अतिरिक्त समय मांगना पड़ा, तो कहीं-कहीं सरकार के भीतर समन्वय की कमी भी उजागर हुई। चंद्राकर की सीधी-सरल लेकिन तीखी शैली ने यह साफ कर दिया कि वे पार्टी लाइन से ऊपर उठकर जनहित को प्राथमिकता देने का संदेश देना चाहते हैं।राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को सत्ता पक्ष के भीतर उभरते वैचारिक दबाव और जवाबदेही की नई कसौटी के रूप में देखा जा रहा है। जहां विपक्ष सरकार को घेरने के लिए इस मौके को भुनाने में जुटा है, वहीं भाजपा के भीतर भी यह चर्चा तेज है कि वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता सरकार के कामकाज पर सख्त निगरानी का संकेत है।कुल मिलाकर, नए विधानसभा भवन में चल रहा यह सत्र न केवल नीतिगत चर्चाओं का मंच बन रहा है, बल्कि सत्ता पक्ष के भीतर उठ रहे सवालों के कारण सरकार के लिए आत्मपरीक्षण का अवसर भी बनता जा रहा है। अजय चंद्राकर की आक्रामक भूमिका ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही और भी अधिक धारदार और चुनौतीपूर्ण होने वाली है।