तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ के नवनिर्मित विधानसभा भवन में अव्यवस्था का आलम सामने आ रहा है। आधुनिक सुविधाओं और भव्य संरचना के दावों के बीच जमीनी हकीकत यह है कि विधानसभा परिसर में न तो आम जनता के बैठने की समुचित व्यवस्था है और न ही वहां ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के लिए। परिणामस्वरूप जनता, भाजपा–कांग्रेस के कार्यकर्ता और आगंतुक घंटों खड़े रहकर अपने-अपने विधायकों से मिलने का इंतजार करते दिखाई दे रहे हैं।विधानसभा परिसर लोकतंत्र का सार्वजनिक मंच होता है, जहां आम नागरिक अपनी बात रखने की उम्मीद लेकर पहुंचता है। लेकिन बैठने जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में लोगों को असुविधा और अपमान का सामना करना पड़ रहा है। खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों के लिए यह स्थिति और भी पीड़ादायक बन गई है।चिंताजनक पहलू यह भी है कि विधानसभा में ड्यूटी कर रहे कर्मचारी, जो व्यवस्था संचालन की रीढ़ हैं, वे भी घंटों खड़े रहने को मजबूर हैं। इससे न केवल उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है, बल्कि कार्यक्षमता और व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।नवनिर्मित विधानसभा भवन से जनता को उम्मीद थी कि यहां सुविधाएं आधुनिक और जनहितकारी होंगी, लेकिन वर्तमान हालात इन दावों पर पानी फेरते नजर आ रहे हैं। जनप्रतिनिधियों और विधानसभा प्रशासन से मांग उठ रही है कि परिसर में तत्काल पर्याप्त बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि लोकतंत्र के इस मंदिर में आने वाले नागरिकों और कर्मचारियों को सम्मानजनक सुविधा मिल सके।