विकास नंद/ सर्वव्यापी/
कांग्रेस पिछड़ा वर्ग विभाग की प्रदेश समन्वयक एवं महिला कांग्रेस की प्रदेश सचिव तिरीथ कुमारी ने केवाईसी के नाम पर राशन कार्डों से पात्र हितग्राहियों के नाम काटे जाने को लेकर प्रदेश की साय सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की विष्णु देव साय सरकार को सत्ता संभाले दो वर्ष पूरे हो चुके हैं। डबल और ट्रिपल इंजन सरकार के दावों के साथ सुशासन और जनता का भविष्य संवारने की बात कही गई थी, लेकिन दो वर्ष बीतने के बाद आमजन के बीच सरकार को लेकर अविश्वास की भावना लगातार गहराती जा रही है।
तिरीथ कुमारी ने कहा कि सरकार पारदर्शिता को अपनी नीतियों की धुरी बताती है, पर जमीनी हकीकत इसके उलट है। पारदर्शिता की आड़ में बड़ी संख्या में पात्र हितग्राही योजनाओं से वंचित किए जा रहे हैं। अपात्रों के साथ-साथ पात्र लोगों के भी नाम काटे जाने से गरीब और जरूरतमंद परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
उन्होंने विशेष रूप से केवाईसी के नाम पर राशन कार्डों में की जा रही अंधाधुंध कटौती पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार के पास आधार कार्ड और बीपीएल राशन कार्ड के जरिए हितग्राहियों की पूरी जानकारी पहले से मौजूद है, तो फिर इस तरह की मनमानी कांट-छांट किस आधार पर की जा रही है।ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों तक, कई पात्र परिवार राशन से वंचित हो रहे हैं। बुजुर्ग, मजदूर और गरीब परिवार महीनों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन समाधान के बजाय उन्हें केवल औपचारिक प्रक्रियाओं का हवाला दिया जा रहा है।उन्होंने कहा कि जिस भरोसे और उम्मीद के साथ जनता ने सरकार को सत्ता सौंपी थी, वही भरोसा अब दो वर्ष बाद उदासीनता और असंतोष में बदलता नजर आ रहा है। योजनाओं के क्रियान्वयन में संवेदनशीलता की कमी और गरीबों के हक पर पड़ती मार ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अंत में तिरीथ कुमारी ने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते इस स्थिति पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया और पात्र हितग्राहियों को उनका हक वापस नहीं दिलाया, तो इसका सीधा असर सरकार की छवि और जनविश्वास पर पड़ेगा। पारदर्शिता के साथ मानवीय दृष्टिकोण अपनाना अब सरकार की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।