तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ी भाषा ये सिरिफ बोलचाल के माध्यम नई, बल्कि छत्तीसगढ़ के माटी, संस्कृति अऊ आत्मा आय। दाई के लोरी ले लेके किसान के गीत तक, हर शब्द म अपनपन बसे हवय। ए बोली म छत्तीसगढ़ के इतिहास, परंपरा अऊ जनजीवन के असली तस्वीर दिखथे।लोक कहावत हे , नाव म विष्णु भगवान रहिथें त भव पार तय हो जाथे। आज छत्तीसगढ़ी भाषा के नाव म खुद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी बैठे हें। एखर से जनता के मन म भरोसा जगे हवय कि अब छत्तीसगढ़ी के दिन बदलीही अऊ ये बोली अपन हक पाही।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी के सोच म भाषा अऊ संस्कृति के खास महत्व हे। वो ये बात समझथें कि विकास के रास्ता संस्कृति ले होके गुजरथे। जब तक अपन बोली सुरक्षित नई रहिही, तब तक विकास के दावा अधूरा रहिही।शिक्षा के क्षेत्र म छत्तीसगढ़ी के प्रवेश बहुत जरूरी हे। प्राथमिक स्तर ले अगर बच्चा मन अपन मातृभाषा म पढ़हीं, त न सिरिफ समझ बढ़ही, बल्कि अपन जड़ ले जुड़ाव घलो मजबूत होही। मातृभाषा म शिक्षा ले आत्मविश्वास अऊ संस्कार दूनों बढ़थे।शासन अऊ प्रशासन म छत्तीसगढ़ी के उपयोग ले सरकार अऊ जनता के दूरी कम होही। जब आम आदमी अपन बोली म आवेदन कर सके, अपन बात रख सके, त शासन सच म लोक शासन बन जाथे।छत्तीसगढ़ी साहित्य, लोककला अऊ रचनाकार मन बर सरकारी संरक्षण जरूरी हे। लोकगीत, नाटक, कविता अऊ कहानी म छत्तीसगढ़ के आत्मा बसथे। अगर एखर सही मंच अऊ सम्मान मिलही, त नई पीढ़ी घलो ए बोली ले जुड़े रहिही।आज डिजिटल जमाना हे। मीडिया अऊ ऑनलाइन मंच म छत्तीसगढ़ी के विस्तार ले ये भाषा देश-दुनिया तक पहुंच सके हवय। सरकार के सहयोग ले छत्तीसगढ़ी डिजिटल पहचान घलो मजबूत हो सकथे।अब समय आ गे हे कि छत्तीसगढ़ी भाषा आयोग ला मजबूत बनाय जाए, जऊन म अधिकार, बजट अऊ निर्णय के ताकत होवय। सिरिफ घोषणा नई, ठोस फैसला अऊ क्रियान्वयन जरूरी हे।छत्तीसगढ़ के जनता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी ले उम्मीद रखथे कि वो छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास ला अपन प्राथमिकता बनाही। नाव म विष्णु हें, संग म जनता हे, अब छत्तीसगढ़ी भाषा के भव पार लगाना तय हे।