तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ के निर्माता, भारत रत्न, भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेई जी के जयंती 25 दिसंबर ला आज पूरा छत्तीसगढ़ बड़े गर्व अऊ सम्मान के संग मनावत हे। ए बछर छत्तीसगढ़ सरकार रजत जयंती वर्ष घलो मना रहल हे, अऊ एही कड़ी मं नगरीय निकाय क्षेत्र मं अटल जी के सम्मान मं “अटल परिसर” नाम देके प्रतिमा स्थापित करे जा रहल हे, जेन ह सही मायने मं सच्ची श्रद्धांजलि आय।लेकिन ए खुशी के माहौल मं एक कड़वा सवाल घलो खड़ा होथे—छत्तीसगढ़ के निर्माता होके घलो अटल बिहारी वाजपेई जी के तस्वीर छत्तीसगढ़ के सरकारी दफ्तर अऊ सरकारी विज्ञापन मं काबर नइ दिखत हे?अटल जी सिरिफ एक नेता नई रहिन, वो छत्तीसगढ़ के पहचान, आत्मसम्मान अऊ अस्तित्व के आधार रहिन। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के सपना ला हकीकत बनाके, करोड़ों छत्तीसगढ़िया मन ला अलग पहचान देनिहार अटल जी के योगदान ला कोनो हाल मं भुलाय नई जा सकय।आज हालत ये हे के कई सरकारी दफ्तर मं अलग-अलग नेता मन के तस्वीर तो लगे हे, फेर राज्य निर्माता अटल जी के तस्वीर के नामोनिशान तक नइ दिखे। सरकारी योजना, विज्ञापन, होर्डिंग अऊ प्रचार सामग्री मं अटल जी के जगह खाली छोड़ दे जाथे, जेन ह न सिरिफ दुर्भाग्यजनक आय बल्कि छत्तीसगढ़ के इतिहास संग अन्याय घलो आय।अगर छत्तीसगढ़ सरकार सच मं अटल जी के सम्मान मं रजत जयंती मना रहल हे, त अटल जी के तस्वीर ला हर सरकारी दफ्तर, हर सरकारी विज्ञापन अऊ हर शासकीय मंच मं अनिवार्य रूप से लगाय जाना चाही। ए काम सिरिफ फोटो लगाय के नई, बल्कि नई पीढ़ी ला अपन इतिहास अऊ राज्य निर्माता के योगदान बताय के जिम्मेदारी आय।अटल जी के नाम मं परिसर बनाना, प्रतिमा लगाना स्वागतयोग्य आय, फेर जब तक सरकारी व्यवस्था मं अटल जी के विचार अऊ तस्वीर के सम्मान नई दिखे, तब तक श्रद्धांजलि अधूरी रहिथे।छत्तीसगढ़ के हर नागरिक के भावना आय के “अटल जी सिरिफ जयंती तक सीमित नई रहें, अटल जी हर सरकारी दफ्तर अऊ हर सरकारी कागज मं दिखें।”एही सच्ची श्रद्धांजलि होही, अऊ एही छत्तीसगढ़ के आत्मसम्मान।