तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
नई दिल्ली में आयोजित 41वें अखिल भारतीय दलित साहित्य सम्मेलन में शिक्षा, साहित्य और सामाजिक चिंतन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्धा के डॉ. राजेश मून को ‘बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर राष्ट्रीय फेलोशिप सम्मान’ प्रदान किया गया।होटल में काम करते हुए अपने जीवन की शुरुआत कर शिक्षा, लेखन और बौद्धिक विमर्श के उच्चतम शिखर तक पहुँचने वाले डॉ. राजेश मून ने अपने संघर्ष, अध्ययन और सतत सामाजिक प्रतिबद्धता के माध्यम से एक प्रेरणादायी यात्रा तय की है। उनके लेखन में दलित विमर्श, सामाजिक न्याय, समकालीन समस्याओं और मानवीय मूल्यों का गहन विश्लेषण देखने को मिलता है।डॉ. मून ने शिक्षा जगत में बहुमूल्य योगदान के साथ-साथ नई सामाजिक थ्योरियों के चिंतन, संगीत उपचार (Music Therapy) एवं ट्रांसलेशन में गहन शोध तथा विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर सशक्त और निर्भीक आवाज़ उठाने का कार्य किया है। इसी व्यापक बौद्धिक और सामाजिक योगदान को देखते हुए उन्हें यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया। सम्मान समारोह में दलित साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. एस. पी. सुमनाक्षर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की सहयोगी संघप्रिया गौतम, पूर्व समाज कल्याण मंत्री बबनराव घोलप, पंजाब के जिला कलेक्टर अभिषेक मून, नेपाल से आए मुख्य अतिथि सहित विभिन्न राज्यों से आए गणमान्य बुद्धिजीवी, साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।इस अवसर पर डॉ. मून ने सम्मान के लिए डॉ. रवि दलाल के प्रति विशेष आभार जताया। डॉ. राजेश मून को मिला यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष और उपलब्धियों की पहचान है, बल्कि यह समकालीन दलित साहित्य, वैकल्पिक ज्ञान परंपरा और सामाजिक परिवर्तन की दिशा में हो रहे प्रयासों को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देता है।