मंत्रालय में ‘जय–वीरू’ की जोड़ी: भैरव नाथ विश्वकर्मा और सतीश ठाकुर की दोस्ती बनी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की पहचान।

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तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/

रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ महानदी भवन मंत्रालय में सामान्य प्रशासन विभाग के अधीन कार्यरत और वर्तमान में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार के निज सचिव भैरव नाथ विश्वकर्मा तथा निज सहायक सतीश ठाकुर की जोड़ी मंत्रालय के गलियारों में किसी पहचान की मोहताज नहीं है। दोनों की आपसी मित्रता की तुलना अक्सर हिंदी सिनेमा की मशहूर फिल्म शोले के जय–वीरू से की जाती है।जहां एक ओर शासकीय कार्यों में दोनों की कार्यकुशलता, समन्वय और निष्ठा अधिकारियों व कर्मचारियों के बीच सराही जाती है, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ की संस्कृति और मातृभाषा छत्तीसगढ़ी को बढ़ावा देने में भी दोनों की भूमिका उल्लेखनीय रही है। वे जहां-जहां भी पदस्थ रहे, वहां स्थानीय संस्कृति, लोकभाषा और छत्तीसगढ़ी अस्मिता को सम्मान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास करते आए हैं।मंत्रालय के कर्मचारी बताते हैं कि भैरव नाथ विश्वकर्मा और सतीश ठाकुर न केवल कामकाज में एक-दूसरे के पूरक हैं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भी छत्तीसगढ़ी भाषा के प्रयोग और प्रचार-प्रसार को लेकर हमेशा अग्रणी रहते हैं। उनकी यह दोस्ती आज केवल व्यक्तिगत संबंध नहीं, बल्कि शासकीय सेवा में सौहार्द, संस्कृति और समर्पण की मिसाल बन चुकी है।


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