तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में पूर्ववर्ती सरकार से लेकर वर्तमान सरकार के कार्यकाल तक विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं में करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इन अनियमितताओं के विरुद्ध छत्तीसगढ़िया एकता मंच के प्रदेश सचिव भागवत प्रसाद के नेतृत्व में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय,वन मंत्री केदार कश्यप,मुख्य सचिव विकास शील और विभाग के अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की कैम्पा फंड, ग्रीन इंडिया मिशन, नेशनल अफॉरेस्टेशन प्रोग्राम, जलवायु परिवर्तन शमन योजनाएं, वन संरक्षण एवं संवर्धन योजनाएं, वन अधिकार अधिनियम से जुड़ी परियोजनाएं, तथा प्लांटेशन व नर्सरी विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी वित्तीय अनियमितताओं की आशंका लगातार सामने आ रही है। आरोप है कि इन योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये का दुरुपयोग किया गया, जबकि जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्य दिखाई नहीं देते।ज्ञापन में यह भी रेखांकित किया गया है कि इन गंभीर आरोपों को लेकर विधानसभा सत्र के दौरान वरिष्ठ विधायकों द्वारा प्रश्न उठाए जा चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मामला केवल विभागीय स्तर का न होकर सीधे तौर पर जनहित और सार्वजनिक धन से जुड़ा हुआ है।विशेष रूप से बिलासपुर संभाग के मरवाही वन मंडल में पदस्थ रहे एक पूर्व वन मंडलाधिकारी पर करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित अधिकारी द्वारा स्वयं को एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का रिश्तेदार बताए जाने के कारण अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है, जिससे प्रशासनिक संरक्षण के आरोप और भी गहरे होते जा रहे हैं।छत्तीसगढ़िया एकता मंच का आरोप है कि वन विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों के संरक्षण के चलते जांच प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं। इससे न केवल भ्रष्टाचार को अप्रत्यक्ष बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि शासन की जीरो टॉलरेंस नीति पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई है किवन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की सभी प्रमुख योजनाओं में हुए व्यय की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।मरवाही वन मंडल में पूर्व डीएफओ के विरुद्ध लगे आरोपों की विशेष जांच एजेंसी अथवा स्वतंत्र समिति से जांच कराई जाए। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोर विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जांच को प्रभावित करने अथवा संरक्षण देने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी पृथक समीक्षा की जाए।प्रदेश सचिव भागवत प्रसाद ने कहा कि यदि समय रहते निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई नहीं की गई तो यह मामला न केवल सार्वजनिक धन की हानि का विषय बनेगा, बल्कि शासन की जवाबदेही और पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य सरकार इस गंभीर विषय पर त्वरित संज्ञान लेते हुए उचित एवं कठोर निर्णय लेगी।