जंगल से जनविश्वास तक…आईएफएस अफसर ग्रीष्मी की कार्यप्रणाली ने वन विभाग में रचा नया भरोसे का अध्याय।

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तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही वन मंडल में पदस्थ आईएफएस अफसर ग्रीष्मी चांद (2020 बैच) की कार्यशैली की सराहना केवल वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि जिले के डीएफओ स्तर से लेकर मैदानी अमले और आम जनता तक उनकी कार्यप्रणाली की खुलकर प्रशंसा हो रही है।वन संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर उनके सख्त लेकिन संवेदनशील निर्णयों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासनिक दृढ़ता और मानवीय दृष्टिकोण साथ-साथ चल सकते हैं। अवैध कटाई पर कड़ी निगरानी, वन अधिकार मामलों में समयबद्ध कार्रवाई और कर्मचारियों से सीधा संवाद उनकी पहचान बन चुकी है।ग्रामीण अंचलों में वनवासियों से सीधा संवाद, समस्याओं का मौके पर समाधान और विभागीय योजनाओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने की पहल से विभाग की छवि मजबूत हुई है। यही कारण है कि आज गौरेला-पेंड्रा-मरवाही वन मंडल को एक अनुशासित, पारदर्शी और परिणामोन्मुख कार्यसंस्कृति के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।सूत्रों की मानें तो डीएफओ कार्यालय से लेकर राज्य स्तर तक यह चर्चा आम है कि युवा आईएफएस अफसर ग्रीष्मी चांद ने अपने अल्प कार्यकाल में ही प्रशासनिक क्षमता, नेतृत्व और ईमानदारी की स्पष्ट छाप छोड़ दी है।वन विभाग के भीतर यह भरोसा भी मजबूत हुआ है कि यदि इसी तरह की कार्यप्रणाली बनी रही तो आने वाले समय में यह मॉडल पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है।


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