विकास नंद/ सर्वव्यापी/
महासमुंद जिले के बागबाहरा संग्रहण केंद्र में खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के दौरान संग्रहित धान में आई सूखत को लेकर फैलायी जा रही भ्रामक एवं तथ्यहीन जानकारी का जिला विपणन अधिकारी द्वारा खंडन किया गया है।जिला विपणन अधिकारी आशुतोष कोसरिया ने स्पष्ट किया कि धान की सूखत को चूहों, कीटों अथवा पतंगों द्वारा खाए जाने से जोड़ना पूर्णतः असत्य है। उन्होंने बताया कि यह सूखत वास्तव में उपार्जन केंद्रों से धान के संग्रहण केंद्रों में भंडारण के बाद कस्टम मिलिंग के अंतर्गत मिलरों को प्रदाय किए गए धान के वजन में आई स्वाभाविक कमी है।उन्होंने जानकारी दी कि धान का भंडारण दिसंबर 2024 से किया गया था तथा इसका अंतिम निराकरण अक्टूबर 2025 में हुआ। लंबे समय तक खुले में भंडारण के कारण धान की प्रकृति में परिवर्तन होना स्वाभाविक है, जिससे सूखत की स्थिति उत्पन्न होती है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जो पूर्ववर्ती वर्षों में भी देखने को मिली है।जिला विपणन अधिकारी ने बताया कि जिले के अन्य संग्रहण केंद्रों में भी औसत सूखत लगभग इसी स्तर की रही है तथा राज्य के संग्रहण केंद्रों में सूखत का औसत प्रतिशत भी इसी के आसपास रहता है।उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रकरण में संबंधित प्रभारी को विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया है। प्राप्त जवाब का परीक्षण कर अग्रिम आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रकरण प्रेषित किया गया है।