कबीरधाम / धनंजय साहू/ ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी /
छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार बने एक साल से ऊपर हो गए हैं लेकिन अभी तक निगम ,मंडल , आयोग में नई नियुक्तियां नहीं हुई है। पूर्ववर्ती सरकार में भी कई निगम ,मंडल, आयोग में नियुक्ति नहीं हो पाई थी। पहले ऐसा लग रहा था कि सरकार के कामकाज संभालते ही आयोग में नियुक्तियां हो जाएंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ । इसके बाद लगा कि लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी निगम मंडल को लेकर बड़ा फैसला लेगी लेकिन फिर निगम ,मंडलों में नियुक्तियां नहीं हुई। इसके बाद जब उपचुनाव हुए तो भी निगम मंडल की सूची जारी नहीं हुई। अब प्रदेश में निकाय चुनाव सिर पर है। ऐसे में अब तक निगम, मंडल, आयोग में नियुक्तियां नहीं हुई हैं। जिसके बाद अब कयास लगने लगे हैं कि क्या बीजेपी पूर्व की कांग्रेस के नक्शे कदम पर चल रही है। कुछ निगम, आयोग, मंडल और बोर्ड पर नियुक्ति दी गई है। जिससे यह कहा जा रहा है कि एक मुश्त आदेश क्यों नहीं किया जा रहा है। वहीं राजनीति के जानकारों का कहना है कि बीजेपी सरकार को एक साल से ऊपर हो चुके हैं, इसके पहले उप चुनाव के बाद निगम ,मंडल, बोर्ड ,आयोग में नियुक्ति को लेकर चर्चा जोरों पर थी, बाद में विधानसभा सत्र आया। उस बीच में निगम, मंडल, बोर्ड ,आयोग में नियुक्ति को लेकर चर्चा थी। नियुक्ति को लेकर सिर्फ चर्चा ही रही, लेकिन अब तक गिने चुने को छोड़ कर अधिकांश पदों पर नियुक्ति नहीं की गई है। वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि इन कामों में देरी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में इन नियुक्तियों को लेकर काफी उम्मीदें और आकांक्षाएं हैं जो लोग इस दौड़ में शामिल हैं वो आज परेशान हैं, इसलिए इन नियुक्तियों में देरी नहीं करना चाहिए।पूर्ववर्ती सरकारों की बात की जाए तो साल 2003 में डॉ रमन सरकार ने सत्ता पर काबिज होने के कुछ महीने बाद ही निगम ,मंडल ,आयोग की नियुक्ति कर दी थी, यानी की 2003 में सरकार बनी और 2004 के शुरुआती महीना में ही निगम मंडल आयोग में नियुक्ति कर दी गईवहीं डॉ रमन सरकार के दूसरे कार्यकाल में भी निगम मंडल आयोग में जल्दी नियुक्ति दी गई, हालांकि रमन सरकार के तीसरे कार्यकाल नियुक्ति में काफी देरी हुई थी। वहीं पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में निगम ,मंडल, आयोग में कुछ नियुक्ति कांग्रेस सरकार बनने के कुछ समय बाद ही हो गई थी, कुछ नियुक्तियां साल डेढ़ साल बाद हुई और कुछ नियुक्तियां 5 साल बाद भी नहीं हुई। जिसमें छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग मुख्य है और इस आयोग में नियुक्ति नहीं होने को लेकर भाजपा ने भूपेश सरकार को जमकर घेरा भी लेकिन खुद की सरकार में भी इस आयोग में अब तक नियुक्ति नहीं हो सकी , आखिर क्यों..? इस सवाल का जवाब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ही दे सकते हैं। वहीं एक साल बाद भी निगम, मंडल, आयोग, में नियुक्ति नहीं की गई है। सरकार को नियुक्ति जल्दी करना चाहिए, जिससे पार्टी नेता कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और इसका लाभ पार्टी मिलेगा।आपको बता दें कि प्रदेश की करीब 30 से अधिक निगम-मंडलों, आयोगों में करीब 200 से अधिक नियुक्तियां होनी है। इस निगम ,मंडल , बोर्ड,आयोग में जगह पाने के लिए पार्टी के नेता कार्यकर्ता एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। उसमें वे नेता भी शामिल है, जो कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए हैं। उम्मीद है कि निगम मंडल आयोग में उन्हें भी जगह दी जाएगी। गौरतलब है कि निगम-मंडल , बोर्ड,आयोगों के अध्यक्षों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया जाता है। इसमें उनके वेतन-भत्ता, गाड़ी, आवास की सुविधा दी जाती है। इसी तरह अलग-अलग मंडल ,आयोगों में सदस्यों को भी सुविधाओं का लाभ मिलता है। इन पदों पर ज्यादातर राजनीतिक व्यक्तियों को ही बैठाया जाता है। बहरहाल बड़े ही चिंतनीय विषय है कि अब तक उक्त पदों पर नियुक्ति नहीं की जा सकती है और अब आने वाले कुछ दिनों में नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर आचार संहिता लागू होने की चर्चा चल रही है। ऐसे में विष्णु देव साय सरकार को एक दो दिन के भीतर ही नियुक्ति जारी करना पार्टी हित में होने की बात कही जा रही है।