विकास नंद/सर्वव्यापी/
जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, लेकिन व्यवस्थागत खामियों के चलते बड़ी संख्या में किसान अब भी अपनी उपज बेचने से वंचित हैं। धान खरीदी के लिए आवश्यक पंजीयन और सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण हो जाने के बावजूद किसानों को टोकन जारी नहीं किए जाने से उनकी परेशानियां बढ़ती जा रही हैं।ग्रामीण क्षेत्रों से आ रही जानकारी के अनुसार कई किसानों के खाते, भूमि रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज पूरी तरह सत्यापित हो चुके हैं, इसके बावजूद पोर्टल के माध्यम से टोकन जारी नहीं किए जा रहे हैं। टोकन नहीं मिलने के कारण किसान उपार्जन केंद्रों में धान नहीं बेच पा रहे हैं, जबकि खरीदी की समय-सीमा तेजी से समाप्त हो रही है।किसानों का कहना है कि शासन द्वारा निर्धारित प्रति किसान खरीदी सीमा (लिमिट) पहले से ही कम है और अब समय-सीमा समाप्त होने की स्थिति में बड़ी मात्रा में धान उनके घरों और खलिहानों में पड़ा हुआ है। मौसम में बदलाव और नमी बढ़ने से धान खराब होने का भी खतरा बना हुआ है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।कई किसानों ने बताया कि वे बार-बार उपार्जन केंद्र, सहकारी समिति और संबंधित कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा है। कुछ स्थानों पर तकनीकी समस्याओं और सर्वर की दिक्कतों के कारण भी टोकन जारी नहीं हो पा रहे हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।इस समस्या को लेकर किसानों ने शासन और जिला प्रशासन से मांग की है कि धान खरीदी की अंतिम तिथि में वृद्धि की जाए तथा प्रति किसान खरीदी लिमिट बढ़ाई जाए, ताकि सभी पात्र किसान अपनी पूरी उपज समर्थन मूल्य पर बेच सकें। किसानों का कहना है कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो उन्हें मजबूरी में निजी व्यापारियों को औने-पौने दामों पर धान बेचने के लिए विवश होना पड़ेगा।किसान संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करते हुए शासन का ध्यान आकर्षित करने की मांग की है। उनका कहना है कि धान खरीदी व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को राहत देना है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में देरी और अव्यवस्था के कारण किसान तनाव में हैं।किसानों को उम्मीद है कि शासन शीघ्र इस गंभीर समस्या पर संज्ञान लेते हुए धान खरीदी की अवधि और लिमिट में आवश्यक संशोधन करेगा, जिससे किसानों को राहत मिल सके और धान खरीदी प्रक्रिया सुचारू रूप से पूर्ण हो सके।