संपादक के कलम से…कागज म सहेजे सपना के मजबूत कंधा : सुबोध कुमार सिंह।

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तरुण कौशिक/संपादक, सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ के शासन-प्रशासन म सबले जियादा जरूरी चीज अगर कुछ हे, त वो हे भरोसा। जनता के भरोसा अऊ शासन के भरोसा- दूनों के बीच जऊन अधिकारी सेतु बनके खड़ा रहिथे, ओखर भूमिका शब्द ले बखान करना आसान नई। अइसनेच एक भरोसेमंद नांव हे- सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रमुख सचिव।राज्य के हर फाइल म जनता के कोई न कोई सपना सहेजे रहिथे। कऊनो रोजगार के, कऊनो विकास के, त कऊनो न्याय के। ए सपना ला कागज ले जमीन तक उतारना जिम्मेदारी के काम आय, अऊ ए जिम्मेदारी ला बोझ नहीं, कर्तव्य समझके निभाय—ए पहचान हे सुबोध कुमार सिंह के।वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुबोध सिंह कई जिला म कलेक्टर रहि चुके हें। जिला प्रशासन के अनुभव ले ओ जानथे कि योजना के भाषा अऊ जमीन के हकीकत म का फर्क होथे। एही अनुभव ओखर हर फैसला म झलकथे—जहां नियम के पालन के संग-संग संवेदनशीलता भी दिखथे।पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के सचिव रहिके, शासन के निरंतरता, नीति निर्माण अऊ राजनीतिक संतुलन के बारीकी ला गहराई ले समझे हें। बाद म केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान अलग-अलग महत्वपूर्ण पद म रहिके राष्ट्रीय प्रशासनिक दृष्टिकोण अर्जित करिस। आज ओही अनुभव मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व म राज्य शासन ला मजबूती देत हे।माइक के आगे खड़े होके आदेश सुनाना अफसरशाही नई होथे, बल्कि फाइल म दबे आम आदमी के पीड़ा ला पहचान के सही समय म सही निर्णय लेना असली प्रशासन आय। सुबोध सिंह के आदेश म आवेश नई, जल्दबाजी नई, बल्कि संतुलन अऊ विवेक साफ झलकथे।आज जब प्रशासन ऊपर सवाल उठथे, तब अइसने अधिकारी भरोसा दिलाथें कि व्यवस्था अब्बड़ दूर नई, बल्कि जनता के साथ खड़ी हे। ओ नाम के प्रचार म नई, काम के असर म विश्वास रखथे। शायद एही कारण हे कि ओखर काम बोले, नांव खुद-ब-खुद सामने आ जाथे।छत्तीसगढ़ शासन के रीढ़ अगर कोई कहे जावंय, त सुबोध कुमार सिंह के नांव ओ सूची म जरूर आही। काबर कि जहाँ आदेश म मानवता समाय रहिथे, ओहा अधिकारी केवल अधिकारी नई रहिथे—दिशा देइय्या बन जाथे।सुबोध कुमार सिंह—जऊन पद ले नई,कर्म ले पहिचाने जाथे।


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