माइलोगिन के नाव: सिरिफ एक दिन काबर ?..

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माइलोगिन सिरतोन जइसन शक्ति, मया के मूर्ति, सहनशीलता के मिसाल। कोनो घर कुरिया के सजीव आत्मा, समाज के नींव, फेर बन जावय त पीढ़ी के गढ़े, फेर बिगड़ जावय त पीढ़ी के डगमगाए। फेर भी, का ए सिरतोन गोठ नइ हे कि येही माइलोगिन ला सरलग अपन हक बर लड़ई लड़ना पड़थे?महिला दिवस मनाय के जरूरत काबर पड़थे? काबर आजो घलौक माइलोगिन ला अपन अधिकार, सुरक्षा, बरोबरी के हक मांगे बर मजबूर होय ल पड़थे? इतिहास देख लेवा, महतारी लक्ष्मीबाई के शौर्य रहय, सावित्रीबाई फुले के शिक्षा संग लड़ई रहय,चाहे कल्पना चावला के अंतरिक्ष तक के सफर सब्बो माइलोगिन अपन-अपन तरीका ले अपन पहिचान गढ़िन। फेर समाज आजो घलौक उहिच गति ले चलत हे?महिला ला सिरिफ घर-परिवार तक संघेर के देखना, ओकर क्षमता ला नानचुक आँकना।आज के समाज बर सबले बड़का चुनौती आय। का कोनो देस के विकास सिरिफ मनखे के आधा जनसंख्या ला संग ले के चले ले हो सकथे? जभे तक सब्बो माइलोगिन ला बरोबरी के अवसर नइ मिलही, तभे तक सिरतोन प्रगति के गोठ सिरिफ लबारी होही।महिला दिवस मनाय के मतलब सिरिफ फूल चढ़ाय, भाषण देय, अउ फोटो खिंचाय नइ हे। सिरतोन मतलब हे—हर माइलोगिन ला अपन मनचाहा जिनगी जिये के अवसर मिलय, ओकर हक ला पहिचान मिले, अउ सब्बो घर-परिवार ओकर सम्मान करय। का ए जिम्मेदारी सिरिफ सरकार के बस हेबय? नइ! ए हमर-तोर, सब्बो के जिम्मेदारी हेबय।आजे के दिन किरिया लेवव कि माइलोगिन के सम्मान सिरिफ एके दिन नइ, सब्बो दिन होय। जभे एक महतारी पढ़ही, तभे सब्बो पीढ़ी शिक्षित होही। जभे एक बहिनी सुरक्षित होही, तभे जम्मो समाज पोठ होही। जभे एक बेटी अपन सपना ला पूरा करही, तभे पूरा देस समृद्ध होही। फेर कानून के गलत फायदा उठाय जाना घलौक संसो के गोठ आय। लबारी आरोप लगाय ले चलत फिरत कानून कमजोर होथे अउ सिरतोन पीड़ित माइलोगिन बर नुकसान होथे एकर ले अइसन नइ करना हेबय खैर..।

फेर महिला दिवस मनाय बर का सिरिफ एके दिन ठउका हे? नइ! जेन दिन सब्बो माइलोगिन निडर होके अपन जिनगी के फैसला खुद ले सकही, उही दिन सिरतोन महिला दिवस होही। तब तक, ए लड़ई चालू रहय।त्रिभुवन लाल साहूबोड़सरा,जाँजगीर छत्तीसगढ़


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