बिलासपुर/तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी /
छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में नगरीय निकाय चुनाव की आरक्षण प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद महापौर की कुर्सी पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होने के बाद से भाजपा कांग्रेस पार्टी में महापौर पद के साथ ही पार्षदों के प्रबल दावेदारों के रुप में दोनों पार्टियों के नेता बैनर-पोस्टर के माध्यम से सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में बिलासपुर शहर का महापौर के पद पर भाजपा कांग्रेस पार्टी के शहरी क्षेत्रों के साथ ही बीते पंचवर्षीय में शामिल ग्रामीण क्षेत्रों के नेता भी अब महापौर बनने के लिए जोर आजमाइश शुरू करने लगे हुए हैं। बिलासपुर शहर में तिफरा, परसदा, सिरगिट्टी के अलावा सकरी ,सरकंडा पार के ग्रामीण क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं द्वारा पार्षद और महापौर के रुप में अपने आप को दावेदार के रुप में सामने ला रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में हो रही चर्चा के अनुसार बिल्हा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम परसदा जो अब निगम में शामिल हैं , यहां से विधायक धरम लाल कौशिक के सुपुत्र देवेन्द्र कौशिक के साथ ही कांग्रेस से परसदा निवासी वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मनहरण लाल कौशिक को भी महापौर पद के रुप में देखा जा रहा है । जबकि देवेन्द्र कौशिक विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे हुए हैं लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रहते धरम पुत्र देवेन्द्र को बिल्हा विधानसभा क्षेत्र से आने वाले समय में टिकट नहीं मिलने की बात कही जा रही है। जबकि देवेन्द्र अपने पिता धरम लाल कौशिक के विरासत को संभालने के लिए अभी से बिल्हा विधानसभा क्षेत्र की गलियों में घूमते नजर आ रहे हैं तो इसी तरह का हाल कांग्रेस नेता मनहरण लाल कौशिक का भी है लेकिन अब दोनों बिलासपुर नगर निगम के निवासी हो चुके हैं ,ऐसे में इन दोनों को बिलासपुर महापौर पद के प्रबल दावेदार के रुप में देखा जाना कोई आश्चर्य की बात नहीं होंगी। जबकि दूसरी ओर महापौर पद पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव के समर्थक के साथ ही पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल के समर्थक भी महापौर पद के दावेदार के रुप में दावेदारी प्रस्तुत कर रहे हैं। बहरहाल देखना है कि बिलासपुर नगर निगम महापौर की कुर्सी पर देवेन्द्र और मनहरण को पार्टी प्रत्याशी बनाते हैं या नहीं।