तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक तंत्र में अपनी सख्त, पारदर्शी और परिणाममुखी कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले आईएएस अधिकारी पी. दयानंद इन दिनों मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सचिव के रूप में अहम जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वर्ष 2006 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के इस अधिकारी ने अपने प्रशासनिक जीवन में कई जिलों में कलेक्टर के रूप में कार्य करते हुए सुशासन और प्रशासनिक कसावट की मजबूत पहचान बनाई है।बिहार के सासाराम से आने वाले पी. दयानंद ने अपने करियर की शुरुआत से ही कठोर प्रशासनिक अनुशासन, तेज निर्णय क्षमता और जमीनी स्तर पर काम करने की शैली से अलग पहचान बनाई। इतिहास विषय में स्नातक (बीए) और आधुनिक भारतीय इतिहास में स्नातकोत्तर (एमए) की शैक्षिक पृष्ठभूमि रखने वाले दयानंद प्रशासनिक दृष्टि से अध्ययनशील और संवेदनशील अधिकारी माने जाते हैं।उन्होंने छत्तीसगढ़ के कई महत्वपूर्ण जिलों में कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। सुकमा, दंतेवाड़ा,कोरबा,बिलासपुर और कवर्धा जैसे जिलों में कार्य करते हुए उन्होंने विकास योजनाओं को गति देने और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं दंतेवाड़ा में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रूप में ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में उल्लेखनीय योगदान दिया।नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में काम करते हुए पी. दयानंद ने शिक्षा और विकास को प्राथमिकता दी। उनके प्रयासों से कई क्षेत्रों में एजुकेशन हब की अवधारणा को लागू किया गया, जिससे दूरदराज के आदिवासी अंचलों के बच्चों को बेहतर शिक्षा का अवसर मिल सका। यह पहल आज भी प्रशासनिक नवाचार के रूप में याद की जाती है।कलेक्टर के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने प्रशासनिक अनुशासन और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने के साथ ही योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए। यही कारण है कि वे ऐसे अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं जो फाइलों से ज्यादा जमीनी हकीकत को प्राथमिकता देते हैं।प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्हें कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी भी मिली। उन्होंने सचिव के रूप में खान विभाग, प्रबंध निदेशक के रूप में समग्र शिक्षा अभियान तथा आयुष विभाग के निदेशक जैसे पदों पर कार्य करते हुए नीति निर्माण और क्रियान्वयन दोनों स्तरों पर अपनी प्रशासनिक दक्षता साबित की।कोरबा के कलेक्टर रहते हुए उन्होंने प्रशासनिक निष्पक्षता का उदाहरण भी पेश किया, जब एक स्थानीय विधायक के घर की पैमाइश और जांच के आदेश दिए गए। उस समय यह फैसला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय जरूर बना, लेकिन इसे कानून के समान अनुपालन और प्रशासनिक निष्पक्षता के रूप में भी देखा गया।वर्तमान में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सचिव के रूप में पी. दयानंद शासन और प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करने की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार की योजनाओं को तेजी से लागू कराने और नीतिगत निर्णयों को धरातल पर उतारने में उनकी प्रशासनिक दक्षता अहम मानी जा रही है।छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक तंत्र में पी. दयानंद को एक ऐसे अधिकारी के रूप में देखा जाता है जो सख्त निर्णय लेने से नहीं हिचकते और विकास के साथ-साथ प्रशासनिक अनुशासन को भी उतनी ही प्राथमिकता देते हैं। यही कारण है कि शासन के महत्वपूर्ण पदों पर उनकी भूमिका लगातार प्रभावी बनी हुई है।