विकास नंद/सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा नगर पालिका परिषद सरायपाली के लिए पांच एल्डरमेन (नामांकित पार्षद) नियुक्त किए जाने के बाद महिला प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खास बात यह है कि सरायपाली नगर पालिका की अध्यक्ष स्वयं एक महिला हैं, इसके बावजूद एल्डरमेन की सूची में एक भी महिला को स्थान नहीं दिया गया। इसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।जारी सूची में डॉ. संकीर्तन प्रधान, घांसी विश्वकर्मा, रविन्द्र पण्डा, मोहन शर्मा एवं मनोज आदित्य को एल्डरमेन नियुक्त किया गया है। सभी पांचों नाम पुरुष हैं, जिससे महिलाओं की भागीदारी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि जब नगर पालिका की कमान एक महिला अध्यक्ष के हाथों में है और सरकार लगातार महिला सशक्तिकरण तथा निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात करती है, तब एल्डरमेन जैसी महत्वपूर्ण नियुक्ति में महिलाओं की पूर्णतः अनदेखी समझ से परे है।क्षेत्र में कई ऐसी महिलाएं हैं जो सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। ऐसे में उनके अनुभव का लाभ नगर पालिका परिषद को मिल सकता था। लोगों का मानना है कि यदि कम से कम एक या दो महिलाओं को एल्डरमेन बनाया जाता, तो महिलाओं से जुड़े मुद्दों और योजनाओं को परिषद में और प्रभावी ढंग से रखा जा सकता था।हालांकि शासन की ओर से इन नियुक्तियों को लेकर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, लेकिन नगर पालिका में महिला अध्यक्ष होने के बावजूद एल्डरमेन की सूची में महिलाओं को स्थान नहीं मिलने से प्रतिनिधित्व और संतुलन को लेकर बहस शुरू हो गई है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि भविष्य में यदि अन्य मनोनयन या अवसर आते हैं, तो क्या महिला प्रतिनिधित्व को उचित महत्व दिया जाएगा।