तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस अधिकारी रवि मित्तल को प्रतिनियुक्ति पर देश के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र प्रधानमंत्री कार्यालय में उप सचिव के पद पर नियुक्त किया गया है। उनकी यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब प्रदेश में उनके कार्यकाल को लेकर लगातार विवाद और आरोप चर्चा में रहे हैं।वर्तमान में रवि मित्तल जनसंपर्क आयुक्त के साथ-साथ मुख्यमंत्री सचिवालय में संयुक्त सचिव की अहम जिम्मेदारी संभाल रहे थे। जनसंपर्क विभाग में उनके कार्यकाल के दौरान मीडिया जगत के एक बड़े वर्ग ने उन पर शासकीय विज्ञापनों के वितरण में भेदभाव करने के गंभीर आरोप लगाए। इतना ही नहीं, विज्ञापन आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार के भी आरोप लगातार उठते रहे, जिससे उनका कार्यकाल विवादों में घिरा रहा।
इन आरोपों के बीच उनका सीधा चयन नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले प्रधानमंत्री कार्यालय में उप सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर होना कई सवाल खड़े कर रहा है। प्रशासनिक गलियारों से लेकर मीडिया जगत तक यह चर्चा जोरों पर है कि जिन पर गंभीर आरोप लगे हों, उन्हें इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी कैसे सौंपी गई।विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री कार्यालय में तैनाती न केवल प्रतिष्ठा का विषय होती है, बल्कि यह केंद्र सरकार के भरोसे और अधिकारी की कार्यकुशलता का भी संकेत मानी जाती है। ऐसे में रवि मित्तल की नियुक्ति ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है, क्या विवादों के बावजूद प्रभावशाली पदों पर नियुक्ति का यह सिलसिला उचित है?अब देखना यह होगा कि केंद्र में नई जिम्मेदारी संभालने के बाद वे अपनी कार्यशैली से इन सवालों का जवाब दे पाते हैं या नहीं, लेकिन फिलहाल यह नियुक्ति प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है।