विकास नंद /सर्वव्यापी
— जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक लेकर मातृ मृत्यु निगरानी एवं शिशु मृत्यु अंकेक्षण की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि समयबद्ध, संवेदनशील और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं ही इस दिशा में सबसे प्रभावी उपाय हैं।
बैठक में कलेक्टर ने हाई रिस्क प्रेग्नेंसी मामलों की समय पर पहचान और सतत फॉलोअप पर जोर देते हुए निर्देश दिए कि गर्भावस्था के साथ-साथ प्रसव के बाद की देखभाल (पोस्ट प्रेग्नेंसी केयर) को भी गंभीरता से लिया जाए। उन्होंने सभी गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच, पोषण परामर्श और आवश्यक उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।कलेक्टर लंगेह ने नर्सिंग केयर की गुणवत्ता पर विशेष बल देते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीय संवेदना का होना अनिवार्य है। अस्पतालों में भर्ती गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाए तथा उनकी देखभाल में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो। साथ ही मरीजों की काउंसलिंग, साफ-सफाई और समुचित देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य परिणामों के लिए समुदाय की भागीदारी जरूरी है और एम्बुलेंस सेवाओं को और अधिक सुलभ बनाया जाएगा ताकि जरूरतमंदों को समय पर सुविधा मिल सके।
समीक्षा के दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव ने जानकारी दी कि पिछले एक वर्ष में जिले में 9 मातृ मृत्यु के प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जिनका ऑडिट किया गया है। विश्लेषण में लगभग 70 से 75 प्रतिशत मामलों में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी को प्रमुख कारण पाया गया। इस पर कलेक्टर ने रेफरल सिस्टम को मजबूत करने और गंभीर मामलों में समय पर उच्च स्तरीय उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने प्रत्येक मातृ एवं शिशु मृत्यु के मामलों का वैज्ञानिक तरीके से अंकेक्षण करने पर जोर देते हुए कहा कि डेटा आधारित मॉनिटरिंग, नियमित समीक्षा और फील्ड स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन से ही ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती है।
बैठक में जिला कार्यक्रम प्रबंधक नीलू धृतलहरे, टीकाकरण अधिकारी अरविंद गुप्ता सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और चिकित्सा अधिकारी उपस्थित रहे।