राजस्व अमले के खिलाफ फूटा जनाक्रोश, सैकड़ों किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे, 7 दिन का अल्टीमेटम।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

कोटा विधानसभा क्षेत्र में राजस्व अमले के खिलाफ लंबे समय से सुलग रहा असंतोष सोमवार को खुलकर सामने आ गया, जब बेलगहना तहसील अंतर्गत आमागोहन-मोहली पटवारी हल्का क्रमांक-1 के सैकड़ों किसान और ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन करने लगे। कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव के नेतृत्व में पहुंचे इन ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए मोर्चा खोल दिया और राजस्व व्यवस्था में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप लगाए।प्रदर्शन के दौरान किसानों ने आरोप लगाया कि धान पंजीयन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में खुलेआम पैसों की मांग की जाती है और पैसे नहीं देने वाले किसानों का पंजीयन रोक दिया जाता है। उनका कहना था कि करीब डेढ़ सौ किसानों का धान पंजीयन प्रभावित हुआ, जिसके चलते वे अपनी उपज बेचने से वंचित रह गए। वहीं दूसरी ओर ऐसे लोगों के नाम पर धान पंजीयन और बिक्री होने के आरोप भी सामने आए, जो वास्तविक उत्पादक नहीं हैं, जिससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।ग्रामीणों ने राजस्व से जुड़े अन्य कार्यों जैसे नामांतरण, बंटवारा और नकल के लिए भी तय दर पर वसूली का आरोप लगाया। किसानों का कहना है कि इन कार्यों के लिए 10 से 20 हजार रुपये तक मांगे जाते हैं और पैसा नहीं देने पर उन्हें डराया-धमकाया जाता है। इस दौरान कुछ व्हाट्सएप चैट्स को भी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिनमें कथित तौर पर जमीन के रकबे में हेरफेर के बदले पैसों की मांग के संकेत मिले हैं।मामले ने और गंभीर रूप तब ले लिया जब शासकीय भूमि की मिट्टी को रेलवे ठेकेदार को लगभग 5 लाख रुपये में बेचने का आरोप भी सामने आया। इसके अलावा आवास निर्माण कार्य में लगे वाहनों को रोककर अवैध वसूली किए जाने की शिकायत भी ग्रामीणों ने की, जिससे राजस्व अमले की कार्यप्रणाली पर व्यापक सवाल खड़े हो गए हैं।विधायक अटल श्रीवास्तव ने स्पष्ट कहा कि समस्या केवल एक पटवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि एसडीएम और तहसील स्तर तक फैली हुई है और यह पूरा तंत्र उच्च अधिकारियों के संरक्षण में संचालित हो रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पिछले एक वर्ष से लगातार शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन अब तक न तो किसी अधिकारी का स्थानांतरण हुआ है और न ही कोई ठोस जांच कार्रवाई सामने आई है, जिससे किसानों में आक्रोश बढ़ता गया।प्रदर्शन के बाद विधायक और किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर संजय अग्रवाल से मुलाकात कर पटवारी अंकित स्वर्णकार को तत्काल हटाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की, साथ ही एसडीएम और तहसीलदार के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग दोहराई गई। अंत में विधायक ने प्रशासन को सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि तय समय के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, क्योंकि अब किसान अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।


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