विकास नंद/सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ विष्णु देव साय सरकार में सचिव स्तर के महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद इन दिनों अपनी सक्रिय, परिणामोन्मुखी और कड़े प्रशासनिक रवैये को लेकर सुर्खियों में हैं। प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टिकोण से देखा जाए तो उनकी कार्यशैली सरकार की प्राथमिकताओं को जमीन पर उतारने में प्रभावी साबित होती नजर आ रही है।खनिज विभाग, जो लंबे समय से अवैध उत्खनन, राजस्व हानि और निगरानी की कमजोरियों जैसे मुद्दों से जूझता रहा है, वहां पी. दयानंद के नेतृत्व में सख्ती और पारदर्शिता की नई पहल देखने को मिली है। विभागीय स्तर पर निगरानी तंत्र को मजबूत करने, अवैध खनन पर अंकुश लगाने और राजस्व संग्रह में वृद्धि के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इन प्रयासों का सीधा असर शासन की आय में वृद्धि और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के रूप में सामने आ रहा है।प्रशासनिक स्तर पर उनकी कार्यशैली को “फील्ड-ओरिएंटेड” और “रिजल्ट-ड्रिवन” माना जा रहा है। वे केवल फाइलों तक सीमित रहने के बजाय जमीनी स्तर पर अमले की जवाबदेही तय करने और समयबद्ध कार्य निष्पादन पर जोर देते हैं। विभागीय बैठकों में स्पष्ट निर्देश, नियमित समीक्षा और सख्त अनुशासन के चलते कार्यसंस्कृति में भी सकारात्मक बदलाव देखा जा रहा है।राजनीतिक दृष्टिकोण से भी विष्णु देव साय सरकार की प्राथमिकताओं—भ्रष्टाचार पर नियंत्रण, पारदर्शिता और सुशासन—को लागू करने में पी. दयानंद की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उनके फैसले सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति को मजबूती देते हुए दिखाई देते हैं, जिससे आम जनता में भी सकारात्मक संदेश गया है।हालांकि, सख्ती के इस दौर में कुछ स्तरों पर असंतोष की आवाजें भी सामने आती रही हैं, लेकिन प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि बड़े सुधारों के लिए शुरुआती प्रतिरोध स्वाभाविक होता है। कुल मिलाकर, खनिज विभाग में पी. दयानंद की कार्यशैली एक सख्त लेकिन परिणाम देने वाले प्रशासक की छवि को मजबूत कर रही है।यदि यही गति और निगरानी बनी रही, तो आने वाले समय में खनिज विभाग न केवल राजस्व के क्षेत्र में बल्कि सुशासन के मॉडल के रूप में भी स्थापित हो सकता है।