नूर मोहम्मद।ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी

गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के पेण्ड्रारोड मरवाही वन विभाग एक बार फिर सूचना के अधिकार (RTI) के मामलों में लापरवाही और जिम्मेदारी से बचने के आरोपों में घिर गया है। वनमंडल मरवाही के वनमंडलाधिकारी कार्यालय से जारी एक आदेश ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।प्राप्त दस्तावेज के अनुसार, आवेदक द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत केंद्रीय नर्सरी से जुड़े पौधों की तैयारी और वितरण संबंधी जानकारी मांगी गई थी। यह आवेदन 6 अप्रैल 2026 को कार्यालय में प्रस्तुत किया गया था। लेकिन जानकारी उपलब्ध कराने के बजाय वन विभाग ने आवेदन को सीधे संबंधित परिक्षेत्र अधिकारी मरवाही को स्थानांतरित कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि आवेदन “आपके परिक्षेत्र से संबंधित” होने के कारण धारा 6(3) के तहत अग्रेषित किया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या वनमंडल स्तर पर उपलब्ध जानकारी को भी जानबूझकर नीचे स्तर पर भेजकर समय टालने की कोशिश की जा रही है?स्थानीय जानकारों का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है, जब वन विभाग ने RTI के जवाब में इस तरह की प्रक्रिया अपनाई हो। इससे पहले भी कई आवेदकों को इसी तरह अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर काटने पर मजबूर होना पड़ा है।विशेषज्ञों के अनुसार, RTI अधिनियम का मूल उद्देश्य पारदर्शिता और समयबद्ध सूचना उपलब्ध कराना है, लेकिन इस तरह के आदेश उस भावना के विपरीत हैं। विभाग द्वारा बार-बार आवेदन को इधर-उधर भेजना न केवल सूचना देने में देरी करता है, बल्कि आवेदक को अनावश्यक रूप से परेशान भी करता है।इस पूरे मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि जब आवेदन वनमंडल कार्यालय में प्राप्त हुआ, तो वहां से संबंधित जानकारी संकलित कर सीधे आवेदक को क्यों नहीं दी गई?अब देखना यह होगा कि वन विभाग इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या आवेदक को समय पर सही जानकारी मिल पाती है या नहीं।