पीसीसीएफ नियुक्ति पर सौदेबाज़ी के आरोप: संघ कनेक्शन, करोड़ों की डील और टूटता भरोसा।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में शीर्ष पद पीसीसीएफ (प्रधान मुख्य वन संरक्षक) की नियुक्ति को लेकर गंभीर आरोपों ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, खुद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का वरिष्ठ कार्यकर्ता बताने वाले एक कथित व्यक्ति “यू के पी” ने एक वन अधिकारी से कथित तौर पर पांच करोड़ रुपये में पीसीसीएफ पद दिलाने का सौदा किया।विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि इसी क्रम में “होली मिलन” के नाम पर एक चर्चित अधिकारी को महज दो लाख रुपये दिए गए, जिससे पूरे प्रकरण की विश्वसनीयता और भी संदिग्ध हो जाती है। यह घटनाक्रम न केवल नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि सिस्टम में कथित बिचौलियों की सक्रियता को भी उजागर करता है।मामले में यह भी दावा किया जा रहा है कि मंत्रालय में पदस्थ एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपने उच्च स्तर के आकाओं के इशारे पर उक्त कथित संघ नेता से मुलाकात की और उनके “पसंदीदा” वन अधिकारी को पीसीसीएफ बनाने पर सहमति बनी। बताया जा रहा है कि आदेश मई महीने में जारी होने की बात तय हुई थी, क्योंकि वर्तमान पीसीसीएफ उसी समय सेवानिवृत्त होने वाले हैं।हालांकि, घटनाक्रम ने अचानक मोड़ तब लिया जब कथित नेता ने होली के बाद नियुक्ति आदेश जारी होने का भरोसा दिलाया, लेकिन समय बीतने के साथ स्थिति बदलती दिख रही है। अब वही व्यक्ति दिल्ली जाकर संबंधित वन अधिकारी के खिलाफ ही कथित रूप से नकारात्मक बातें कर रहा है, जिससे पूरे सौदे पर सवालिया निशान लग गया है।इस बीच, एक “पावरफुल” अधिकारी द्वारा वन अफसर को फोन कर “यू के पी” से मिलने की सलाह दिए जाने की बात भी सामने आई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि मामला केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक नेटवर्क की ओर इशारा करता है।सवाल उठते हैं:क्या शीर्ष पदों की नियुक्ति में इस तरह की सौदेबाज़ी वास्तव में हो रही है?क्या विभागीय और राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग कर योग्य अधिकारियों को दरकिनार किया जा रहा है?और सबसे बड़ा सवाल—क्या इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होगी?फिलहाल, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से अंदरखाने चर्चाएं तेज हैं, उससे यह मामला आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बन सकता है। वहीं सर्वव्यापी इस पूरे मामले की तह तक छानबीन कर रही है और यह “यूकेपी” का फुल फॉर्म क्या है और आरएसएस नेता कौन है,इसकी खोजबीन होने के बाद पूरे मामले का खुलासा करेंगे तो पढ़ते रहिए….


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