तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक व्यवस्था और सुशासन के दावों के बीच एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां राज्य के मुख्य सचिव के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में कार्रवाई ठप नजर आ रही है। छत्तीसगढ़िया एकता मंच की शिकायत पर विकास शील द्वारा विभागीय अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा को मरवाही वन मंडल सहित अन्य वन मंडलों में कैम्पा योजना एवं अन्य योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार की जांच के आदेश दिए गए थे, लेकिन तीन माह बीतने के बाद भी जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया जा सका है।मामले में हैरानी की बात यह है कि विभाग स्वयं अपने स्तर पर पीसीसीएफ (प्रधान मुख्य वन संरक्षक) को लगातार पत्र लिखकर कार्रवाई का अनुरोध करता रहा, फिर भी न तो जांच पूरी हो सकी और न ही कोई ठोस रिपोर्ट सामने आई। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं और यह संकेत मिल रहा है कि कहीं न कहीं जिम्मेदार अधिकारी ही जांच को ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास कर रहे हैं।इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य सरकार के सुशासन के दावों पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। विशेषकर जब विष्णु देव साय द्वारा चलाए जा रहे ‘सुशासन तिहार’ जैसे अभियानों के बीच इस तरह की लापरवाही सामने आती है, तो प्रशासनिक प्रतिबद्धता पर संदेह होना स्वाभाविक है।सूत्रों का मानना है कि यदि मुख्य सचिव के आदेशों का समय पर पालन नहीं हो पा रहा है, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि विभाग के भीतर गहरे स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार और मिलीभगत की ओर इशारा करता है। आरोप यह भी लग रहे हैं कि कैम्पा योजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में वित्तीय अनियमितताओं को दबाने के लिए ही जांच को लंबित रखा जा रहा है।अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है और क्या दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।