रेत माफिया के निशाने पर नदियां: सरायपाली अंचल में जल संकट के गहराते संकेत..जल सरंक्षण की कवायद पर गंभीर सवाल।

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विकास नंद/ सर्वव्यापी/

सरायपाली, पिथौरा और बसना क्षेत्र की नदियां इन दिनों अवैध रेत खनन और अनियंत्रित दोहन के कारण गंभीर खतरे में हैं। क्षेत्र में लगातार नदी से अवैध रूप से रेत का परिवहन किया जा रहा है, वहीं नदी किनारों पर बड़े पैमाने पर अवैध ईंट निर्माण कार्य भी जारी है। इससे न केवल नदियों का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा है, बल्कि जल संरक्षण की व्यवस्था भी चरमराने लगी है।स्थानीय लोगों के अनुसार, नदियों में रेत का अत्यधिक दोहन होने से अब स्थिति यह बन गई है कि कई स्थानों पर रेत पूरी तरह समाप्त होने की कगार पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि नदी में रेत का होना जल स्तर बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक होता है। रेत पानी को सोखकर भू-जल स्तर को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन लगातार हो रहे अवैध खनन से यह संतुलन बिगड़ता जा रहा है।गहराता जल संकटसरायपाली क्षेत्र में जल संकट के हालात दिन-ब-दिन गंभीर होते जा रहे हैं। कई गांवों में 600 से 1000 फीट गहराई तक बोरिंग करने के बावजूद पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। इससे ग्रामीणों को पेयजल के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।विभागीय उदासीनता पर सवालइस पूरे मामले में खनिज विभाग और राजस्व विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अवैध गतिविधियां खुलेआम चल रही हैं, लेकिन संबंधित विभाग मौन साधे हुए हैं। यदि समय रहते इस पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में क्षेत्र को भीषण जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन का सामना करना पड़ सकता है।जल संरक्षण की कवायद पर उठे सवालजहां एक ओर शासन-प्रशासन जल संरक्षण को लेकर विभिन्न योजनाएं और अभियान चला रहा है, वहीं दूसरी ओर नदियों के इस प्रकार हो रहे दोहन से इन प्रयासों की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगने लगे हैं।समय रहते कार्रवाई जरूरीपर्यावरणविदों और जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध रेत खनन और ईंट निर्माण पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि नदियों का अस्तित्व बचाया जा सके और भविष्य के जल संकट को टाला जा सके।


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