आखिर राजेंद्र के खिलाफ सियाराम ने क्यों की कांग्रेस पदाधिकारियों से शिकायत…? पढ़े पूरी खबर।

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बिलासपुर/ तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी

जिले के वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजेंद्र शुक्ला के खिलाफ बिलासपुर जिले के वरिष्ठ नेता संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों को शिकायतों का पुलिंदा भेज रहे हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है और अब राजेंद्र शुक्ला के ही विधानसभा क्षेत्र बिल्हा के पूर्व विधायक सियाराम कौशिक सहित कांग्रेस के अन्य पदाधिकारियों ने प्रदेश कांग्रेस संगठन को चिट्ठी लिखकर इन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। लगातार ब्लॉक अध्यक्ष, नगर पालिका अध्यक्ष प्रत्याशी व पार्षद उम्मीदवार हार के बाद अब कांग्रेस नेता राजेंद्र शुक्ला के खिलाफ बिल्हा के पूर्व विधायक सियाराम कौशिक और ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष गीतांजलि कौशिक ने मोर्चा खोल दिया है। पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज से शिकायत कर राजेंद्र को पार्टी से निष्कासित करने की मांग की है। उन्होंने राजेंद्र पर भाजपा प्रत्याशी पुनीता डहरिया के साथ सांठगांठ कर जिला पंचायत चुनाव भारी वोटों से जीतने, ओबीसी वर्ग का विरोध करने व कांग्रेस पार्टी को हर तरह से नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है।पूर्व विधायक कौशिक ने पत्र में कहा है कि जिलाध्यक्ष रहने के दौरान राजेंद्र ने पार्टी के समानांतर गुट बनाने का काम किया था, जिसके कारण 2018 के विधानसभा चुनाव में बिल्हा में सर्वाधिक वोटों से भाजपा जीती। 2023 के विधानसभा व 2024 के लोकसभा चुनाव में राजेंद्र व उनके साथियों ने पार्टी विरोधी काम किया। बिल्हा में राजेंद्र की पत्नी के चुनाव प्रचार में वहीं लोग नजर आए जिन्हें राजेंद्र ने भाजपा व आप में प्रवेश कराया था। भाजपा प्रत्याशी पुनीता डहरिया किसी गांव में प्रचार करने नहीं गई और न ही पोस्टर-बैनर ही दिखेاराजेंद्र ने सांठगांठ कर चुनाव भारी वोटों से जीता जबकि 5 साल पहले यहां कांग्रेस प्रत्याशी हारी थीं। राजेंद्र भाजपा से साठगांठ कर पत्नी को उपाध्यक्ष बनवाना चाहते थे। लेकिन स्मृति त्रिलोक श्रीवास को उपाध्यक्ष प्रत्याशी घोषित हो गई। निकाय चुनाव में वार्ड 5 से लेकर 12 में राजेंद्र के लोग भाजपा को लाभ पहुंचाने व कांग्रेस को हराने में लगे थे। बोदरी, बिल्हा, सरगांव व पथरिया निकाय में राजेंद्र ने अपने लोगों को कांग्रेस प्रत्याशियों के हरवाने भिड़ा दिया। इधर, राजेंद्र शुक्ला ने खुद पर लगे आरोपों पर कुछ भी कहने से इनकार किया है।ब्लॉक अध्यक्ष गीतांजलि ने पत्र में आगे कहा कि राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी ने गुजरात में कहा कि कांग्रेस के चंद नेता अपने निजी व अपने निजी स्वार्थ के कारण भाजपा से सांठगांठ कर पार्टी का बेड़ा गर्क करते हैं। राजेंद्र शुक्ला भी ऐसा ही कर रहे हैं। पार्टी ने उन्हें युवा कांग्रेस का जिलाध्यक्ष, ग्रामीण जिलाध्यक्ष व बिल्हा से विधानसभा प्रत्याशी बनाया। कृषि उपज मंडी में अध्यक्ष रहे और पीसीसी डेलीगेट बने। उनके परिवार से अनीता नपं तिफरा व शाला विकास समिति में अध्यक्ष तो अब जिपं सदस्य हैं। पर राजेंद्र शुक्ला ने हर चुनाव में पार्टी के प्रत्याशी को हराने में भूमिका निभाई। बिल्हा से केवल राजेंद्र की पत्नी ही जीतीं। पूर्व विधायक सियाराम कौशिक ने पत्र में बताया कि बिल्हा विधानसभा में जो भी ओबीसी वर्ग का व्यक्ति कांग्रेस से अधिकृत होकर चुनाव लड़ता है, खासकर यादव, साहू, कुर्मी या लोधी, उसे राजेंद्र हराने के लिए काम करते हैं। कहीं गोपनीय तो कहीं खुले तौर पर उनके द्वारा हारने का प्रयास किया जाता है और बड़े पैमाने पर फंडिंग भी की जाती है अधिकृत प्रत्याशी खिलाफ यह अपने लोगों को दूसरे दलि निर्दलीय चुनाव लड़वाते हैं गीतांजलि ने राजेंद्र को ओबीसी विरोधी बताया है।पूर्व विधायक कौशिक और ब्लॉक अध्यक्ष ने अपने पत्र में लिखा है कि नगर पालिका बोदरी अध्यक्ष प्रत्याशी बिमला सुनील साहू, ब्लॉक अध्यक्ष लक्ष्मीनाथ साहू और अन्य प्रत्याशियों ने राजेंद्र के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की थी लेकिन अब तक उन्हें नोटिस भी नहीं हुआ। चूंकि राजेंद्र पीसीसी डेलीगेट हैं, इसलिए एक्शन पीसीसी ही ले सकती है। जिला पंचायत पंचायत क्रमांक 4 बिल्हा में जिला सदस्य जिला पंचायत सदस्य अनीता राजेंद्र शुक्ला जहां से जीती है। उनके अंतर्गत 6 जनपद सदस्य आते हैं। जिसमें तीन सामान्य वर्ग एक पिछड़ा वर्ग और दो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। इसमें सभी कांग्रेस समर्थित जनपद सदस्यों को हार का सामना करना पड़ा, सभी छह बीजेपी के जनपद सदस्यों का जीत मिली है। इससे यह स्पष्ट साबित होता है कि राजेंद्र शुक्ल ने बीजेपी से साठगांठ करके अपनी पत्नी के पक्ष में वोट करवाया है।


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