आश्रय की तलाश कर रही बहन को मिला सहारापांजरा में सद्भावना की प्रेरणादायी मिसाल!

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

मानवता आज भी जीवित है, इसका एक प्रेरणादायी उदाहरण हाल ही में महाराष्ट्र वर्धा जिले के पांजरा बंगला गांव में देखने को मिला। इंटीग्रेटेड सोसायटी ऑफ मीडिया प्रमोटर्स, लखनऊ के अध्यक्ष चंद्रशेखर द्वारा 7 एवं 8 फरवरी 2026 को वर्धा में आयोजित अधिवेशन में कोल्हापुर जिले के कबनूर निवासी एन. एन. काज़ी ने भाग लिया था। इस दौरान संस्था द्वारा जंगल भ्रमण का आयोजन किया गया था। भ्रमण के समय पांजरा बंगला निवासी छबीबाई शेषराव जाधव का जर्जर और टूट चुका घर एन. एन. काज़ी के ध्यान में आया। उस अवसर पर आयोजित एक छोटी सभा में उन्होंने छबीबाई के घर की मरम्मत कराने की इच्छा व्यक्त की। घर ढह जाने के कारण उन्हें खुले आसमान के नीचे रहने के लिए मजबूर होना पड़ा था। इस कठिन परिस्थिति में स्वातंत्र्यवीर निजामुद्दीन काज़ी सद्भावना केंद्र, कबनूर ने उनकी सहायता के लिए हाथ बढ़ाया।एन. एन. काज़ी ने अपने मित्रों, रिश्तेदारों और परिचितों से सहयोग राशि एकत्र कर छबीबाई के घर निर्माण हेतु 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। यह सहायता वर्धा के वन्यजीव संरक्षक कौशल मिश्र, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी बी. एस. मिरगे, एबेकस अकादमी की संचालिका निलीमा मुणोत तथा अधिवक्ता ताम्रध्वज बोरकर के माध्यम से छबीबाई जाधव को सौंपी गई।इस अवसर पर पांजरा बंगला के सरपंच शेषराव आड़े, सहायक वन संरक्षक एम. आड़े, वन रक्षक शिवाजी सावंत तथा अक्षय जाधव उपस्थित थे। आड़े और वाघ ने इस सहायता की सराहना की, जबकि सरपंच शेषराव आड़े ने ग्राम विकास कार्यों में सहयोग देने का आश्वासन दिया।कोल्हापुर से लगभग 1200 किलोमीटर दूर रहने वाली एक जरूरतमंद बहन की पीड़ा को समझते हुए प्रदान की गई यह सहायता सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय संवेदना का प्रेरक उदाहरण बन गई है। छबीबाई तथा ग्रामवासियों ने सद्भावना केंद्र और एन. एन. काज़ी के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। इस सहयोग से एक परिवार को नए जीवन की आशा मिली है और यह अनेक लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना है।इस अवसर पर वन विभाग के अधिकारियों तथा आई.एस.एम.पी. के पदाधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए छबीबाई के आंगन में वृक्षारोपण भी किया।


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