तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
सारंगढ़ विधानसभा क्षेत्र की विधायक उत्तरी गणपत जांगड़े ने प्रदेश के शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के हित में वर्ष 2026 के लिए खुली एवं न्यायसंगत स्थानांतरण नीति तत्काल लागू करने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखा है। विधायक ने अपने पत्र में कर्मचारियों की समस्याओं और जनहित को ध्यान में रखते हुए स्थानांतरण नीति लागू किए जाने को आवश्यक बताया है।विधायक जांगड़े ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न विभागों में कार्यरत हजारों अधिकारी एवं कर्मचारी शासन-प्रशासन की रीढ़ हैं। यही कर्मचारी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। लंबे समय से खुली स्थानांतरण नीति लागू नहीं होने के कारण अनेक कर्मचारी व्यक्तिगत, पारिवारिक एवं सामाजिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं।उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से कर्मचारियों, शिक्षक संगठनों, स्वास्थ्य कर्मियों एवं अन्य विभागीय कर्मचारियों द्वारा लगातार ज्ञापन और मांग पत्र प्राप्त हो रहे हैं। इनमें स्थानांतरण नीति लागू करने की प्रमुख मांग की गई है। कई कर्मचारी वर्षों से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं, जिसके कारण उनके परिवार, बच्चों की शिक्षा तथा स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताएं प्रभावित हो रही हैं।विधायक ने कहा कि वर्तमान सरकार का उद्देश्य कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना और उन्हें बेहतर कार्य वातावरण उपलब्ध कराना है। यदि कर्मचारियों को उनकी आवश्यकतानुसार स्थानांतरण का अवसर मिलता है तो उनका मनोबल बढ़ेगा और वे शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।उन्होंने यह भी कहा कि आगामी समय में शासन की विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यों के सफल संचालन के लिए कर्मचारियों का संतुष्ट एवं प्रेरित होना आवश्यक है। ऐसे में खुली स्थानांतरण नीति लागू करना कर्मचारियों और प्रशासन दोनों के हित में होगा।मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में विधायक उत्तरी जांगड़े ने आग्रह किया है कि कर्मचारियों की वर्षों पुरानी मांग को गंभीरता से लेते हुए वर्ष 2026 के लिए खुली एवं पारदर्शी स्थानांतरण नीति शीघ्र लागू की जाए, ताकि कर्मचारियों को न्याय मिल सके तथा शासन के प्रति उनका विश्वास और अधिक मजबूत हो।राजनीतिक एवं प्रशासनिक हलकों में विधायक द्वारा उठाया गया यह मुद्दा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कर्मचारी संगठनों के बीच भी इस पहल को सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है और माना जा रहा है कि यदि सरकार इस दिशा में शीघ्र निर्णय लेती है तो प्रदेश के हजारों कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।