तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ राज के निर्माण केवल प्रशासनिक पुनर्गठन नई रहिस, बल्कि ये लाखों छत्तीसगढ़िया मन के बरसों पुराना सपना के साकार रूप रहिस। भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी के दूरदर्शी सोच अऊ मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के परिणाम स्वरूप 1 नवंबर 2000 ला छत्तीसगढ़ अलग राज के रूप मं पहचान मिलिस। अटल जी के सपना रहिस कि नवा राज अपन संसाधन, संस्कृति अऊ जनभावना के आधार मं विकास के नवा प्रतिमान गढ़ही।बीते पच्चीस बछर मं छत्तीसगढ़ विकास के अनेक पड़ाव पार करे हे। राज्य के पहिली मुख्यमंतरी अजीत जोगी अऊ डॉ. रमन सिंह के शासनकाल मं आधारभूत संरचना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली अऊ ग्रामीण विकास मं उल्लेखनीय काम होइस। ओकर बाद भूपेश बघेल सरकार के समय किसान, ग्रामीण अर्थव्यवस्था अऊ छत्तीसगढ़ी अस्मिता ल केंद्र मं रखके कई योजना संचालित करे गीस। वर्तमान मं मुख्यमंतरी विष्णु देव साय के नेतृत्व मं सरकार विकास के गति ल आगे बढ़ावत दिखत हे। ए बात मं कोनो दो मत नइ हे कि प्रदेश लगातार प्रगति के रद्दा मं आगे बढ़त हे।फेर लोकतंत्र मं केवल विकास के दावा पर्याप्त नई होवय, विकास के लाभ जनता के जीवन मं साफ-साफ दिखना घलो जरूरी होथे। जनता जेन भरोसा से सरकार ल पांच बछर के जिम्मेदारी सौंपथे, ओ भरोसा मं खरा उतरना हर सरकार के सबसे बड़े दायित्व आय। सड़क, पुल, भवन अऊ उद्योग के संग-संग शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि अऊ सांस्कृतिक संरक्षण घलो विकास के महत्वपूर्ण आधार आय।आज जरूरत ए बात के हे कि मुख्यमंतरी विष्णु देव साय केवल राजनीतिक सीमारेखा तक सीमित नई रहंय, बल्कि अटल बिहारी वाजपेयी जी के समान व्यापक अऊ समावेशी दृष्टिकोण अपनावंय। अटल जी हमेशा दलगत राजनीति ले ऊपर उठके राष्ट्रहित अऊ जनहित ल प्राथमिकता देय रहिन। छत्तीसगढ़ जइसन सांस्कृतिक रूप ले समृद्ध राज मं घलो एही सोच के आवश्यकता हे।छत्तीसगढ़ी भाषा हमर पहचान आय। ए भाषा केवल बोलचाल के माध्यम नई, बल्कि हमर इतिहास, लोकजीवन, परंपरा अऊ संस्कृति के जीवंत दस्तावेज आय। आज आवश्यकता हे कि छत्तीसगढ़ी भाषा ल शिक्षा, प्रशासन अऊ जनसंचार के क्षेत्र मं अउ अधिक सम्मान अऊ अवसर मिले। छत्तीसगढ़ी सिनेमा अऊ लोककला मं प्रदेश के संस्कृति, रीति-रिवाज, लोकगीत अऊ लोकनृत्य के संरक्षण बर विशेष पहल करे जावय। जब तक अपन संस्कृति मजबूत नई होही, तब तक विकास के यात्रा अधूरी रहिही।मुख्यमंतरी विष्णु देव साय के पास अनुभवी अऊ कुशल प्रशासनिक टीम उपलब्ध हे। मुख्य सचिव विकास शील, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, सुब्रत साहू, रेणु पिल्ले, ऋचा शर्मा प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सोनमणि बोरा, निहारिका सिंह बारिक, पी. दयानंद, शम्मी आबिदी, यशवंत कुमार, भुवनेश यादव, सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, आईपीएस अरुण गौतम,पवन देव, विवेकानंद, रतन लाल डांगी, हिमांशु गुप्ता सहित अनेक वरिष्ठ आईएएस, आईपीएस अऊ राज्य प्रशासनिक सेवा ले पदोन्नत अधिकारी मन के अनुभव प्रदेश के विकास यात्रा मं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकथे। प्रशासनिक दक्षता अऊ राजनीतिक इच्छाशक्ति के सही समन्वय होही, त छत्तीसगढ़ देश के सबसे विकसित अऊ सुशासित राज्य बने के दिशा मं तेजी ले आगे बढ़ सकथे।आज छत्तीसगढ़ के सामने अवसर घलो हे अऊ चुनौती घलो। प्राकृतिक संसाधन, युवा शक्ति, कृषि क्षमता, औद्योगिक संभावना अऊ सांस्कृतिक समृद्धि के दृष्टि ले प्रदेश देश के अग्रणी राज्य बने के क्षमता रखथे। जरूरत केवल ए बात के हे कि विकास के केंद्र मं आम जनता के आकांक्षा, पारदर्शिता, जवाबदेही अऊ सांस्कृतिक स्वाभिमान ल रखे जावय।अटल बिहारी वाजपेयी जी के सपना केवल नवा राज बनाना नई रहिस, बल्कि एक समृद्ध, आत्मनिर्भर अऊ गौरवशाली छत्तीसगढ़ के निर्माण करना रहिस। अब समय आ गे हे कि सरकार, प्रशासन अऊ समाज मिलके ए सपना ल नई ऊंचाई तक पहुंचावंय। यदि विकास अऊ संस्कृति के संतुलन बना के जनभावना के अनुरूप नीति निर्माण होही, त वो दिन दूर नई जब छत्तीसगढ़ देश के प्रथम विकसित अऊ आदर्श राज्य के रूप मं अपन अलग पहचान बनाही।
