तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में इन दिनों एक चर्चा तेजी से चल रही है कि आखिर ऐसा क्या है कि अनेक आईपीएस अधिकारी कोरबा जिले का पुलिस अधीक्षक (एसपी) बनने के लिए उत्सुक दिखाई देते हैं। राज्य के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक और राजस्व देने वाले जिलों में शामिल कोरबा केवल एक जिला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की ऊर्जा राजधानी माना जाता है। यहां की जिम्मेदारी संभालना किसी भी पुलिस अधिकारी के लिए प्रतिष्ठा, चुनौती और अवसर—तीनों का संगम माना जाता है। वर्तमान में कोरबा के पुलिस अधीक्षक के रूप में सिद्धार्थ तिवारी पदस्थ हैं। कोरबा देश के सबसे बड़े कोयला उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। यहां स्थित विशाल खदानें, ऊर्जा संयंत्र और औद्योगिक प्रतिष्ठान न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे में जिले की कानून-व्यवस्था, औद्योगिक सुरक्षा, खनिज परिवहन और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि कोरबा में सफल कार्यकाल किसी भी आईपीएस अधिकारी के करियर को नई पहचान दे सकता है। यहां कार्य करने वाले अधिकारी को खनन माफिया, अवैध परिवहन, औद्योगिक विवाद, श्रमिक आंदोलन, सड़क सुरक्षा, पर्यावरणीय मुद्दों और अपराध नियंत्रण जैसे कई मोर्चों पर एक साथ काम करना पड़ता है। ऐसे जिले में बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों की प्रशासनिक क्षमता स्वतः स्थापित हो जाती है।राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी कोरबा का महत्व अत्यधिक है। जिले में बड़े उद्योग समूह, सार्वजनिक उपक्रम और हजारों करोड़ रुपये के आर्थिक हित जुड़े हुए हैं। ऐसे में यहां पदस्थ अधिकारी सीधे राज्य शासन, गृह विभाग और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की निगाह में रहते हैं। यही कारण है कि कोरबा में पदस्थापना को कई आईपीएस अधिकारी अपने करियर के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखते हैं।लोगों का कहना है कि कोरबा की जिम्मेदारी केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है। जिले में कोयला परिवहन, औद्योगिक सुरक्षा, साइबर अपराध, संगठित अपराध और सामाजिक तनाव जैसी चुनौतियां लगातार बनी रहती हैं। ऐसे में यहां की पुलिस कप्तानी किसी भी अधिकारी के नेतृत्व कौशल की वास्तविक परीक्षा मानी जाती है।विभागीय सूत्रों के अनुसार, आगामी प्रशासनिक फेरबदल की चर्चाओं के बीच पुलिस महकमे में भी संभावित बदलावों को लेकर अटकलें तेज हैं। हालांकि सरकार की ओर से किसी प्रकार का आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है, लेकिन कोरबा जैसे महत्वपूर्ण जिले की कमान किस अधिकारी को मिलेगी, इस पर प्रशासनिक गलियारों में हमेशा विशेष रुचि बनी रहती है।राजनीतिज्ञों का मानना है कि जिस प्रकार रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव जैसे जिले पुलिस अधिकारियों के लिए प्रतिष्ठित माने जाते हैं, उसी प्रकार कोरबा भी अब एक “हाई-प्रोफाइल पुलिस पोस्टिंग” के रूप में स्थापित हो चुका है। यही वजह है कि जब भी तबादलों की चर्चा शुरू होती है, कोरबा एसपी की कुर्सी को लेकर सबसे अधिक चर्चाएं सुनाई देती हैं। कुल मिलाकर, कोरबा केवल एक जिला नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की औद्योगिक धड़कन है, और इसी धड़कन की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालना हर महत्वाकांक्षी आईपीएस अधिकारी के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है।
