भागवत प्रसाद, ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी
बिलासपुर जिले के बिल्हा विकासखंड के चकरभाठा ग्राम पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और घोटाले का मामला सामने आया है। ग्रामीणों की शिकायत पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत बिलासपुर ने मामले की जांच के आदेश दिए थे।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पीएम आवास योजना के तहत स्वीकृत आवासों का निर्माण हितग्राहियों द्वारा नहीं कराया गया। नियमानुसार स्वीकृत राशि सीधे हितग्राही के खाते में जमा होती है और निर्माण की जिम्मेदारी भी हितग्राही की होती है। लेकिन व्यवहार में चकरभाठा के तत्कालीन सरपंच पति ने निर्माण की जिम्मेदारी ली थी।शिकायत के अनुसार, हितग्राहियों के आवास का निर्माण किए बिना ही उनके खातों से फर्जी हस्ताक्षर कर राशि का आहरण कर लिया गया। इस सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र में तत्कालीन सरपंच पति की भूमिका पूरी तरह संदेहास्पद बताई जा रही है।सीईओ जिला पंचायत के आदेश पर गठित जांच दल ने निर्माण स्थल का निरीक्षण कर स्वीकृत आवासों का भौतिक सत्यापन किया और प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। प्रतिवेदन के आधार पर सीईओ जिला पंचायत ने FIR दर्ज करने का आदेश भी जारी कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि आदेश के बावजूद आज दिनांक तक FIR दर्ज नहीं की गई है। साथ ही जांच दल ने केवल आवासों का भौतिक सत्यापन किया। आवासों की निर्माण गुणवत्ता और खातों से फर्जी हस्ताक्षर द्वारा राशि आहरण की जांच प्रतिवेदन में शामिल नहीं की गई।ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई के लिए FIR दर्ज होना आवश्यक है। FIR होने पर ही “दूध का दूध और पानी का पानी” हो सकेगा। मांग की जा रही है कि मामले में नामजद FIR के बजाय तथ्यों के आधार पर FIR दर्ज की जाए। हितग्राहियों और तत्कालीन सरपंच पति के हस्ताक्षर/लिखावट का मिलान कराने के लिए हैंडराइटिंग एक्सपर्ट का सहयोग लिया जाए, जिससे फर्जी हस्ताक्षर से राशि आहरण करने वाले दोषियों के विरुद्ध पुख्ता प्रमाण मिल सकें।सीईओ जिला पंचायत द्वारा FIR का आदेश दिए जाने के बाद भी थाने में प्रकरण दर्ज न होना कई सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों ने कलेक्टर से तत्काल हस्तक्षेप कर दोषियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने और राशि की वसूली की मांग की है।