विकास नंद/सर्वव्यापी
जिले में संचालित खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से बुधवार को महासमुंद, पिथौरा और सरायपाली विकासखंड की कुल 20 ग्राम पंचायतों में कृषक चौपाल एवं कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रमों में किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और जैविक खेती के महत्व की विस्तृत जानकारी दी गई।अभियान के अंतर्गत 30 जून तक जिलेभर में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में विकासखंड महासमुंद की 5, पिथौरा की 10 तथा सरायपाली की 5 ग्राम पंचायतों में कृषक चौपालों का आयोजन कर किसानों को रासायनिक उर्वरकों के सीमित एवं समझदारीपूर्ण उपयोग के लिए प्रेरित किया गया।कृषि वैज्ञानिकों एवं विभागीय अधिकारियों ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से भूमि की प्राकृतिक उर्वरता और दीर्घकालिक उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है। इस चुनौती से निपटने के लिए जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी लाभकारी है।कार्यक्रमों में किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, प्राकृतिक खेती के लाभ, हरी खाद, नील हरित काई के उपयोग तथा जैविक उत्पादों की जानकारी दी गई। साथ ही यूरिया एवं डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके, एसएसपी, जैव उर्वरक, नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, जैविक खाद एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया।कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड की अनुशंसाओं के अनुरूप उर्वरकों के संतुलित उपयोग का संदेश देते हुए खेती की लागत कम करने और भूमि की उर्वरता बनाए रखने के उपायों से अवगत कराया। कृषक चौपालों में किसानों ने भी प्राकृतिक खेती और वैकल्पिक उर्वरकों को लेकर अपने अनुभव साझा किए तथा विशेषज्ञों से विभिन्न कृषि संबंधी विषयों पर चर्चा की।