विकास नंद/ सर्वव्यापी

भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक एवं महान शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर सरायपाली नगर के हृदय स्थल जयस्तंभ चौक स्थित सदाशिव माधवराव गोलवलकर गुरुजी ध्यान केंद्र में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों, कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने डॉ. मुखर्जी के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।सभा में वक्ताओं ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उनका त्याग, राष्ट्रभक्ति और दूरदर्शी नेतृत्व आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के अग्रदूत के रूप में उन्होंने कश्मीर में “दो विधान, दो प्रधान और दो निशान” की व्यवस्था का मुखर विरोध किया तथा अखंड भारत के संकल्प को सशक्त स्वर प्रदान किया।वक्ताओं ने यह भी उल्लेख किया कि बंगाल को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने के लिए डॉ. मुखर्जी ने महत्वपूर्ण संघर्ष किया। उनके विचार और राष्ट्र प्रथम का सिद्धांत आज भी देश को एकजुट एवं सशक्त बनाने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने डॉ. मुखर्जी के आदर्शों और विचारों का स्मरण करते हुए राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता तथा भारत की एकता और अखंडता के प्रति सदैव समर्पित रहने का संकल्प लिया।श्रद्धांजलि सभा के अंत में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान को नमन करते हुए कहा गया कि उनका जीवन और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए निरंतर प्रेरित करता रहेगा। उनके बलिदान दिवस पर उपस्थित सभी लोगों ने उन्हें कोटि-कोटि नमन अर्पित किया।