72 घंटे में पुलिस का प्रहार 20 लाख की फिरौती के लिए अगवा व्यापारी सकुशल बरामद, तीन राज्यों के शातिर गिरोह का भंडाफोड़… पढ़ें वारदात की पूरी खबर।

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नूर मोहम्मद,गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (सर्वव्यापी)

मरवाही में दिनदहाड़े व्यापारी के अपहरण से दहशत में आए जिले को आखिरकार राहत मिल गई है। महज 72 घंटे के भीतर जीपीएम पुलिस ने एक सनसनीखेज अपहरण कांड का पर्दाफाश करते हुए 20 लाख रुपये की फिरौती मांगने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के तीन शातिर सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है। सबसे बड़ी बात यह रही कि अपहृत व्यापारी गिरीश यादव को पुलिस ने सकुशल बरामद कर लिया।जिस वारदात ने तीन दिन पहले पूरे जिले को झकझोर दिया था, उसी मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने अपराधियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। गिरफ्तार आरोपी महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के निवासी हैं, जो पुलिस का भेष धारण कर राज्यों की सीमाएं पार करते हुए संगठित अपराध को अंजाम दे रहे थे।कनपटी पर पिस्टल, घर से जबरन उठाया और मांग डाली 20 लाख की फिरौती 20 जून की सुबह करीब 11 बजे ग्राम उषाढ निवासी व्यवसायी गिरीश यादव अपने घर पर थे। इसी दौरान एक कार में सवार बदमाश उनके घर पहुंचे और पिस्टल की नोक पर उन्हें जबरन वाहन में बैठाकर फरार हो गए। दिनदहाड़े हुई इस वारदात से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई।घटना के बाद परिजनों की शिकायत पर मरवाही थाना में अपहरण, धमकी और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया। मामला तब और गंभीर हो गया जब अपहरणकर्ताओं ने गिरीश यादव को छोड़ने के बदले 20 लाख रुपये की फिरौती की मांग कर दी। *एक मोबाइल की गलती ने खोला पूरे गैंग का राज*अपराधियों ने अपहरण की पूरी योजना तो बनाई थी, लेकिन जल्दबाजी में एक ऐसी गलती कर बैठे जिसने पूरे गिरोह को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। अपहरण के दौरान बदमाश पीड़ित का मोबाइल घर पर ही छोड़ गए। बाद में उसी मोबाइल पर फिरौती के कॉल आने लगे। यहीं से पुलिस को पहला बड़ा सुराग मिला। कॉल डिटेल, टॉवर लोकेशन, डिजिटल ट्रैकिंग और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण ने अपराधियों तक पहुंचने का रास्ता खोल दिया। साइबर ट्रैकिंग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से टूटा अंतरराज्यीय नेटवर्कपुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज रामगोपाल गर्ग के मार्गदर्शन और पुलिस अधीक्षक मनोज खिलारी के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अविनाश मिश्रा के नेतृत्व में जिला साइबर सेल और मरवाही पुलिस ने तकनीकी जांच का ऐसा जाल बिछाया कि अपराधियों के छिपने के सभी रास्ते बंद हो गए।छत्तीसगढ़ पुलिस ने पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर घेराबंदी की और अपहृत गिरीश यादव को सकुशल मुक्त करा लिया। साथ ही तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से पुलिस रिमांड प्राप्त हुई है। नकली पुलिस बनकर करते थे वारदात, स्कॉर्पियो पर लगी थी नीली बत्ती जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को पुलिसकर्मी बताकर लोगों को झांसे में लेते थे। इनके कब्जे से एक पिस्टल, छह जिंदा कारतूस, छह एंड्रॉइड मोबाइल फोन तथा एक स्कॉर्पियो-एन वाहन बरामद किया गया है।सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि स्कॉर्पियो में नीली बत्ती लगी हुई थी और वाहन पर “पुलिस” लिखी प्लेट भी लगी थी। प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि आरोपी इसी नकली पहचान का इस्तेमाल कर टोल नाकों और सुरक्षा जांच से बचते हुए राज्यों की सीमाएं पार करते थे।

तीन राज्यों से जुड़े निकले आरोपी, रिमांड में खुल सकते हैं कई बड़े राज गिरफ्तार आरोपियों में पुंडलिक केंद्रे (पिता लक्ष्मण केंद्रे, उम्र 37 वर्ष), निवासी उमरगा (रेतू), थाना जलकोट, जिला लातूर (महाराष्ट्र), चंद्रेशखर (पिता गंगाराम, उम्र 30 वर्ष), निवासी बाशनी, सरस्वती नगर ओम कॉलोनी, जिला जोधपुर (राजस्थान) तथा शेषपाल सिंह (पिता हरि प्रसाद सिंह, उम्र 30 वर्ष), निवासी नगला भिक्की सुराया, थाना एका, जिला फिरोजाबाद (उत्तर प्रदेश) शामिल हैं।पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह प्रतीत हो रहा है, जो पुलिस का भेष धारण कर गंभीर वारदातों को अंजाम देता था। आरोपियों से पूछताछ के दौरान देश के विभिन्न राज्यों में हुई अन्य घटनाओं और गिरोह के फरार सदस्यों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की संभावना है।

ऑपरेशन को सफल बनाने वाली पुलिस टीमइस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने में मरवाही एसडीओपी राजेश देवांगन, थाना प्रभारी निरीक्षक केशैलेन्द्र सिंह, अजाक थाना प्रभारी निरीक्षक अंजना केरकट्टा, उपनिरीक्षक श्यामलाल गढ़ेवाल, उपनिरीक्षक सुरेश ध्रुव, उपनिरीक्षक सनत मात्रे तथा चौकी प्रभारी सिवनी नवीन मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

तकनीकी जांच एवं साइबर ट्रैकिंग में जिला साइबर सेल प्रभारी सउनि मनोज हनोतिया, प्रधान आरक्षक रवि त्रिपाठी तथा आरक्षक दुष्यंत मसराम ने अहम जिम्मेदारी निभाई।इसके अतिरिक्त उपनिरीक्षक रोहित डहरिया, प्रधान आरक्षक मनोरंजन कुजूर, जगदीश नामदेव, गुलाब प्रजापति, अजय सिंह, अशोक गौतम, आरक्षक राजेश शर्मा, मनोज मरावी, महिला आरक्षक सरिता मरावी एवं नगर सैनिकों ने भी ऑपरेशन में उल्लेखनीय योगदान दिया। *दहशत से राहत तक*तीन दिन में बदली कहानी जिस घटना ने मरवाही सहित पूरे जीपीएम जिले में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया था, उसी मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने अपहृत व्यापारी को सुरक्षित वापस लाकर बड़ी सफलता हासिल की है।

पुलिस अधीक्षक मनोज खिलारी के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अविनाश मिश्रा के नेतृत्व में संचालित इस कार्रवाई को जीपीएम पुलिस की हाल के वर्षों की सबसे बड़ी और सफल ऑपरेशनल उपलब्धियों में माना जा रहा है।

अब पुलिस रिमांड के दौरान इस अंतरराज्यीय गिरोह के अन्य सदस्यों, पूर्व में की गई वारदातों तथा इसके पूरे नेटवर्क से जुड़े कई बड़े खुलासों की उम्मीद की जा रही है।


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