क्या फिर लौटेंगे डॉ. रमन सिंह? छत्तीसगढ़ की राजनीति में बदलाव की अटकलों के बीच तेज हुई चर्चाएं।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों सत्ता और संगठन के बीच संभावित बदलाव को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद ढ़ाई वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन प्रशासनिक कसावट, जनप्रतिनिधियों की शिकायतों और सरकार के कामकाज को लेकर समय-समय पर उठते सवालों ने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। इन्हीं चर्चाओं के बीच पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का नाम एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में दिखाई दे रहा है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व समय-समय पर राज्यों में संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर बड़े फैसले लेने के लिए जाना जाता है। छत्तीसगढ़ में भी सरकार और संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार समीक्षा किए जाने की चर्चाएं सामने आती रही हैं। ऐसे माहौल में यह सवाल उठने लगा है कि यदि भविष्य में कोई बड़ा राजनीतिक या प्रशासनिक फेरबदल होता है तो पार्टी किस चेहरे पर भरोसा जताएगी।इसी संदर्भ में डॉ. रमन सिंह का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। वर्ष 2003 से 2018 तक लगातार 15 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह को भाजपा का सबसे अनुभवी और स्वीकार्य चेहरा माना जाता है। प्रशासनिक अनुभव, संगठन पर पकड़ और नौकरशाही के साथ बेहतर समन्वय उनकी राजनीतिक पहचान रही है। यही कारण है कि सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर जब भी असंतोष की चर्चा होती है तो राजनीतिक विश्लेषकों के बीच उनका नाम स्वतः चर्चा में आ जाता है।हाल ही में बेमेतरा जिले में आयोजित एक सामूहिक विवाह कार्यक्रम के दौरान अव्यवस्थाओं को लेकर डॉ. रमन सिंह द्वारा सार्वजनिक रूप से नाराजगी व्यक्त किए जाने की चर्चा राजनीतिक हलकों में लंबे समय तक होती रही। कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने इसे केवल एक कार्यक्रम की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर उनकी स्पष्ट सोच के रूप में देखा। हालांकि इस घटना को लेकर किसी प्रकार की आधिकारिक राजनीतिक व्याख्या सामने नहीं आई है।दूसरी ओर सरकार के कुछ मंत्रियों के कार्यालयों और उनके ओएसडी की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष और सामाजिक संगठनों द्वारा समय-समय पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। स्थानांतरण प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, जनप्रतिनिधियों की अनुशंसाओं पर कार्रवाई और प्रशासनिक निर्णयों की गति जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में बने हुए हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि किसी सक्षम जांच एजेंसी द्वारा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक चर्चाओं में इन्हें सरकार की छवि से जोड़कर देखा जा रहा है।भाजपा संगठन के भीतर भी यह धारणा समय-समय पर सामने आती रही है कि सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। कई क्षेत्रों से प्रशासनिक ढिलाई और अधिकारियों की बढ़ती मनमानी को लेकर शिकायतें सामने आने की बातें कही जाती रही हैं। ऐसे में अनुभवी नेतृत्व की आवश्यकता पर भी चर्चा होती रहती है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डॉ. रमन सिंह की सबसे बड़ी ताकत उनका लंबा प्रशासनिक अनुभव और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता है। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने संगठन और सरकार के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया था, जिसके कारण आज भी भाजपा के एक बड़े वर्ग में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। विधानसभा अध्यक्ष के रूप में संवैधानिक पद पर रहते हुए भी उनकी राजनीतिक सक्रियता और जनसंपर्क लगातार चर्चा का विषय बने रहते हैं।हालांकि यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि वर्तमान में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार काम कर रही है और भाजपा के किसी भी बड़े नेता या केंद्रीय नेतृत्व की ओर से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है। इसलिए फिलहाल यह पूरा विषय राजनीतिक चर्चाओं और अटकलों के दायरे में ही माना जाएगा।फिर भी छत्तीसगढ़ की राजनीति में डॉ. रमन सिंह का नाम आज भी एक प्रभावशाली और निर्णायक राजनीतिक व्यक्तित्व के रूप में देखा जाता है। यदि भविष्य में कभी संगठन या सरकार के स्तर पर बड़े बदलाव की स्थिति बनती है तो उनके अनुभव और राजनीतिक स्वीकार्यता को नजरअंदाज करना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा। यही कारण है कि सत्ता परिवर्तन की हर चर्चा के केंद्र में एक बार फिर डॉ. रमन सिंह का नाम प्रमुखता से सुनाई देने लगा है।


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