जियाउद्दीन खान, ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी

मुंगेली जिले में कथित निवेश घोटाले और ठगी के एक गंभीर मामले ने तूल पकड़ लिया है। मृतक अजय देवांगन की पत्नी सुनीता देवांगन ने पुलिस अधीक्षक मुंगेली को लिखित आवेदन सौंपकर ऋषि देवांगन, अरुण बंजारे एवं नीलू यादव के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने की मांग की है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने अधिक मुनाफे का लालच देकर लाखों रुपये निवेश करवाए, लेकिन बाद में न तो रकम लौटाई और न ही संतोषजनक जवाब दिया। पीड़िता का दावा है कि इसी आर्थिक और मानसिक तनाव के कारण उनके पति की तबीयत बिगड़ी और अंततः उनकी मृत्यु हो गई।आवेदन के अनुसार, मृतक अजय देवांगन पिछले कुछ समय से लगातार तनाव में थे। जब परिवार ने उनकी परेशानी का कारण जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि बिलासपुर निवासी ऋषि देवांगन और उनके सहयोगी अरुण बंजारे ने एक निवेश योजना के माध्यम से अधिक लाभ दिलाने का भरोसा दिलाया था। बताया गया था कि निवेश की गई राशि कुछ ही महीनों में दोगुनी अथवा कई गुना तक बढ़ जाएगी। इसी विश्वास में आकर अजय देवांगन सहित कई लोगों ने उक्त योजना में रकम लगाई। पीड़िता के मुताबिक, फरवरी 2026 में मुंगेली के एक होटल में आयोजित बैठक में निवेश योजना की जानकारी दी गई थी। इस बैठक में कई स्थानीय लोग भी मौजूद थे। आरोप है कि बैठक के दौरान निवेशकों को भरोसा दिलाया गया कि उनका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा और उन्हें निश्चित लाभ मिलेगा। इसी भरोसे के आधार पर अजय देवांगन ने लगभग चार लाख रुपये तक की राशि विभिन्न माध्यमों से जमा कर दी। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ समय बाद जब अजय देवांगन ने अपनी निवेश की गई राशि और लाभ के संबंध में जानकारी मांगी तो उन्हें लगातार टालमटोल जवाब दिए गए। कभी कंपनी की योजना अपडेट होने का हवाला दिया गया तो कभी तकनीकी कारणों का बहाना बनाया गया। आरोप है कि बाद में संबंधित लोगों ने फोन उठाना भी बंद कर दिया और व्हाट्सएप संदेशों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।पीड़िता ने आरोप लगाया कि ऋषि देवांगन, अरुण बंजारे और उनकी महिला सहयोगी नीलू यादव लगातार निवेश बढ़ाने का दबाव बनाते रहे। उनका कहना था कि योजना में किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा और अधिक राशि निवेश करने पर बड़ा लाभ मिलेगा। इसी भरोसे में कई लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई उक्त योजना में लगा दी। आवेदन में दावा किया गया है कि पैसा वापस नहीं मिलने और लगातार अनिश्चितता के कारण अजय देवांगन गहरे मानसिक तनाव में चले गए थे। परिवार के अनुसार, वे दिन-रात इसी चिंता में रहते थे कि उनकी जमा पूंजी वापस मिलेगी या नहीं। बताया गया है कि 11 जून को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। बाद में रायपुर में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। चिकित्सकीय रिपोर्ट में हाईपरटेंशन से जुड़ी स्वास्थ्य समस्या का उल्लेख किया गया है। सुनीता देवांगन ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि उनके पति की मानसिक स्थिति बिगड़ने के पीछे कथित निवेश घोटाला और पैसा वापस न मिलना प्रमुख कारण रहा। उन्होंने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, निवेश से जुड़े दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और मोबाइल चैट की जांच करने तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि अजय देवांगन अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं थे जिन्होंने उक्त योजना में पैसा लगाया था। आवेदन के साथ कुछ अन्य लोगों के नाम भी गवाह के रूप में दिए गए हैं, जिन्होंने कथित रूप से इसी तरह के निवेश और लेनदेन की जानकारी होने की बात कही है। पीड़िता का कहना है कि यदि मामले की गहन जांच की जाए तो कई और प्रभावित लोगों की जानकारी सामने आ सकती है। फिलहाल यह मामला पुलिस के संज्ञान में है और शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई की मांग की जा रही है। मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है तथा संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।