बिलासपुर/तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी /
छत्तीसगढ़ राज्य ल बने 25 बछर होके हवै अऊ ईहा छत्तीसगढ़िया मन के नई बल्कि परदेसिया मन के राज चले ल सुरु होके हवै, जऊन हम छत्तीसगढ़िया मन के सिधवा पन के कारन आए अऊ हम छत्तीसगढ़िया मन के अस्तित्व ल सरकार नई बल्कि अब छत्तीसगढ़िया मन ल खुद बचाए बर आघू आए ल पड़ही। छत्तीसगढ़ राज्य ल ” धान के कटोरा ” कहे जाथे फेर अब ए नाव बस के रई जाही,आईसन लगत हवै। काबर के किसान मन अब खेती-बाड़ी, खेती-किसानी के कामबूता नई करके अपन खेती-बाड़ी ल परदेसिया मन मेर बेचत हे अऊ परदेसिया मन ए जमीन म खेती-बाड़ी नई बल्कि घर- दूवार बनाके करोड़ों -अरबो रुपिया कमावत हवै। आज हमर सरकार के अनदेखी के कारन किसान मन के काय हाल हे एला सबों जानथ हे फेर कोनों खुलके नई बोल पावण हवै। देस के जाने-माने शिवपुराण कथा कहवईया पंडित प्रदीप मिश्रा घलोक ह राजनांदगांव के छूरिया हालेकोशा के शिवपुराण कथा म किसान मन ल कहे हवै के ” छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया ” अऊ ईही कारन आज छत्तीसगढ़ म परदेसिया मन के बोलबाला दिन ब दिन बढ़त हे,पंडित प्रदीप मिश्रा घलोक ह अपन कथा के माध्यम ले छत्तीसगढ़िया मन ले बिनती करें हवै के छत्तीसगढ़ के किसान भाई मन अपन खेती-बाड़ी ल मत बेचव,अऊ खेती-बाड़ी के माध्यम ले छत्तीसगढ़ ल अंतरराष्ट्रीय स्तर म पहिचान दिलाए के गोठ बात करें हे। निश्चित रूप ले पंडित प्रदीप मिश्रा जी के गोठ बात ल किसान मन ल सोचे के जरुरत हे, काबर के पंडित जी ह अपन बर नई बल्कि हम छत्तीसगढ़िया के भलाई बर बिनती करें हे। हमर स्थानीय नेता मन खुद हमर छत्तीसगढिया मन ल महत्व नई देवय अऊ दू-चार पईसा के लालच म परदेसिया मन ल महत्व देवत हे,जेखर कारन आज छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढ़िया मन ले जादा परदेसिया मन तरक्की करत हे अऊ छत्तीसगढ़िया मन अपन किस्मत ल कोसत हवै। आज छत्तीसगढ़ ल ” धान के कटोरा ” छत्तीसगढ़ मन के किसान के बदौलत कहे जावत हे फेर आवाईया बेरा म ए मान-सम्मान ह बस नाव बस के रई जाही,कारन हम सबों ल पता हे,ए कारन छत्तीसगढ़िया मन ल सोचे समझे के बड़ जरूरत हवै, काय ओमन अपन खेती-बाड़ी ल बेच के अपन छत्तीसगढ़ महतारी के अपमान नई करत हे, परदेसिया मन खेती-बाड़ी जमीन ल खरीद के खेती-किसानी नई बल्कि बड़ -बड़ कारखाना, कालोनी बना ही, अऊ हमर छत्तीसगढ के किसान खुद के जमीन मालिक बने हे आवाईया बेरा म परदेसिया मन के नौकर बन के रहे ल मजबूर हो जाही। आईसन म छत्तीसगढ़िया मन ल अब बड़ सोच- समझ के अपन खेती-बाड़ी ल परदेसिया मन ल बेचे के फैसला करना चाही, छत्तीसगढ़िया मन सबले बढ़िया लोगन आए , अऊ छत्तीसगढ़िया मन आईसन लोगन आए जऊन मन अपन महतारी,बेटी,बहू के गोठ बात दूर दूसर के बेटी, बहू अउ महतारी ल अपन मनाथे तव फेर छत्तीसगढ़िया मन अपन खेती-बाड़ी ल बेच के अपन छत्तीसगढ़ महतारी के अपमान काबर करत हे..?आज दूसर परदेस म जाके देखव,दूसर परदेस म परदेसिया मन ल बसे नई पाबे फेर हमर छत्तीसगढ़ म तौ परदेसिया मन बसत हे बल्कि परदेसिया होए के घलोक बाद छत्तीसगढ़ म सान से राज करत हे,अऊ छत्तीसगढ़िया मन परदेसिया मन के नौकर बने के हालत म पहुंच चुके हवै। अब 25 बछर के जवान छत्तीसगढ़ के लोगन मन ल अपन अस्तित्व अऊ छत्तीसगढ़ महतारी के मान-सम्मान बर परदेसिया मन के खिलाफ आवाज उठाए ल पड़ ही,तभे छत्तीसगढ़िया मन के छत्तीसगढ़ म अस्तित्व बने रई ही नई तौ फेर आवाईया बेरा म परदेसिया मन के नौकर बनके रई हव!