नूर मोहम्मद ,गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (सर्वव्यापी)
गौरेला नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में मोहर्रम का पर्व शनिवार को पूरी अकीदत, अनुशासन और गंगा-जमुनी तहज़ीब के साथ मनाया गया। हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इस्लाम धर्म के संस्थापक और अंतिम पैगंबर थे उनके नवासे और हज़रत अली व हज़रत फातिमा (र.ज़ि.) के छोटे बेटे थे। वे सत्य, न्याय और इंसानियत के रक्षक माने जाते हैं, जिन्होंने 680 ईस्वी में कर्बला की जंग में ज़ालिम शासक यज़ीद की बैअत (अधीनता) स्वीकार करने से इनकार कर अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदानऔर कर्बला के 72 शहीदों की याद में निकाले गए ताजिया जुलूस में हजारों अकीदतमंद शामिल हुए। “या हुसैन” की सदाओं के बीच निकले जुलूस ने इंसानियत, सब्र, कुर्बानी और भाईचारे का ऐसा संदेश दिया, जिसने पूरे नगर को श्रद्धा और मोहब्बत के रंग में रंग दिया।खानकाह-ए-जहांगीरिया टीकरकला के सज्जादा नशीन सूफी हाजी मोहम्मद हबीब जहांगीरी शाह के मार्गदर्शन में तैयार किए गए ताजिया शरीफ टीकरकला से रवाना होकर बस्ती का भ्रमण करते हुए हुसैनी मस्जिद पहुंचे, जहां पारंपरिक अखाड़ों का शानदार प्रदर्शन किया गया। इसके बाद जुलूस मासूम गली होते हुए गौरेला पहुंचा।ऐतिहासिक ताजिया मिलान ने बांधा श्रद्धा का समांगौरेला स्थित मदीना मस्जिद के समीप टीकरकला, गोरखपुर और गौरेला के ताजियों का ऐतिहासिक मिलाप हुआ। इसके बाद जफर बाबा एवं गौरेला ताजिया कमेटी के मार्गदर्शन में सभी ताजिए एवं अखाड़े निर्धारित मार्गों से नगर भ्रमण पर निकले। आकर्षक रोशनी, नीले गुंबदों और उत्कृष्ट कारीगरी से सजे ताजियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। पूरे मार्ग में “या हुसैन” की सदाओं के बीच अकीदतमंदों ने गम-ए-हुसैन को पूरे एहतराम के साथ याद किया।जगह-जगह हुआ इस्तकबाल, सेवा और भाईचारे की दिखी मिसालताजिया जुलूस के स्वागत में विभिन्न स्थानों पर सामाजिक संगठनों एवं स्थानीय नागरिकों ने पानी, शर्बत, फल, बिस्कुट और लंगर की व्यवस्था कर अकीदतमंदों का गर्मजोशी से इस्तकबाल किया। हर वर्ग के लोगों की सहभागिता ने आपसी सौहार्द, सेवा और सामाजिक एकता की अनूठी मिसाल पेश की।ज़ुमाबाद, टीकरकला और गौरेला में आम लंगर में उमड़ी भीड़मोहर्रम के अवसर पर ज़ुमा की नमाज़ के बाद हुसैनी मस्जिद टीकरकला एवं खानकाह-ए-जहांगीरिया में दिन में आम लंगर तकसीम किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों को बैठाकर प्रेमपूर्वक लंगर खिलाया गया। वहीं शाम से गौरेला स्थित मदीना मस्जिद के समीप मुस्लिम कम्युनिटी हॉल में भी विशाल आम लंगर का आयोजन किया गया, जहां देर रात तक सभी समुदायों के लोगों को बैठाकर लंगर परोसा गया। सैकड़ों लोगों ने लंगर ग्रहण कर मोहब्बत, बराबरी, इंसानियत और आपसी भाईचारे के संदेश को आत्मसात किया।अखाड़ों में युवाओं ने दिखाए हैरतअंगेज करतबमोहर्रम जुलूस के दौरान पारंपरिक अखाड़ों का प्रदर्शन आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। युवाओं ने लाठी, डंडे और पारंपरिक युद्ध कलाओं के रोमांचक एवं हैरतअंगेज करतब प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। अनुशासन, जोश और कौशल से भरपूर इन प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को उत्साह से भर दिया।पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी रही काबिल-ए-तारीफहजारों लोगों की मौजूदगी वाले इस विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान गौरेला पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। जुलूस मार्ग के प्रमुख स्थानों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा तथा सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी गई। पुलिस की सतर्कता, प्रशासनिक समन्वय और आमजन के सहयोग से मोहर्रम का पूरा आयोजन शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।मोहर्रम का यह आयोजन केवल मातम की परंपरा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की कुर्बानी, इंसानियत, न्याय, सेवा, भाईचारे और सामाजिक एकता का ऐसा संदेश दे गया, जिसने गौरेला की गंगा-जमुनी तहज़ीब को एक बार फिर मजबूती से जीवंत कर दिया।