कबीर की दृष्टि में समग्रता के साथ समन्‍वय है : प्रो. पूरनचंद टंडन।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय वर्धा महाराष्ट्र में कबीरदास की जयंती के उपलक्ष्‍य में सोमवार, 29 जून को ‘कबीरदास का समग्र अवदान’ विषय पर विशिष्‍ट व्‍याख्‍यान में संबोधित करते हुए दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय के वरिष्‍ठ प्रोफेसर प्रो. पूरनचंद टंडन ने कहा कि कबीरदास ने समाज में व्‍याप्‍त कुरीतियों एवं अंधविश्‍वास पर प्रहार किया। उनकी दृष्टि में समग्रता के साथ समन्‍वय प्रदर्शित होता है। महादेवी वर्मा सभागार में आयोजित व्‍याख्‍यान के दौरान ऑनलाइन माध्‍यम से कबीर के समग्र अवदान पर प्रकाश डालते हुए प्रो. टंडन के कहा कि कबीर विशुद्ध अद्वैतवादी साधक थे। उनके विचार में आत्‍मसमर्पण व आत्‍मविलय के गुण थे, जिससे उन्‍होंने अपने दोहों के माध्‍यम से समाज को जागरूक किया। कबीर का काव्‍य, चिंतन, प्रेमसाधना और निष्‍पाक चेतना से ओतप्रोत हैं। उनके पास अध्‍यात्‍म की शक्ति थी। ललित कला, वास्‍तु कला, चित्रकला और गायन कला जैसी कलाओं से उनका जीवन समृद्ध था। उनके जीवन-दर्शन पर नाटक, कविता, कहानियां, उपन्‍यास और धारावाहिक की रचनाएं की गयी जिससे उनके समृद्ध दर्शन को सामने लाया गया। उनके दोहे के अनुवाद के कारण उन्‍होंने वैश्विक लोकप्रियता हासिल की। कबीर पंथ के माध्‍यम से उनके विचारों का प्रचार-प्रसार हो रहा है और अनेक विश्‍वविद्यालयों में कबीर केंद्र स्‍थापित किए गए हैं। उनके विचार आज भी समाज के लिए दिशादर्शक है। प्रो. टंडन ने कबीर की उलबासियों और पारिभाषिक शब्‍दावली की भी विस्‍तार से चर्चा की। उनमें ज्ञान, भक्ति और कर्म का उद्भुत समन्‍वय है एक अर्थ में उनका साहित्‍य नीति साहित्‍य भी है जो आचरण पर बल देती है। कार्यक्रम के स्‍वागत वक्‍तव्‍य एवं प्रास्‍ताविकी में हिंदी साहित्‍य विभाग के अध्‍यक्ष प्रो. अवधेश कुमार ने कबीरदास के समग्र अवदान को बताते हुए उनके द्वारा रचित दोहे, साखियों का विस्‍तार से विश्‍लेषण किया। उन्‍होंने कहा कि कबीर सामान्‍य अर्थ में समाज सुधारक नहीं है वे आध्‍यात्मिक संघर्ष करने वाले साधक है। वे मानव मात्र की एकता के प्रतीक हैं। कार्यक्रम का संचालन हिंदी साहित्‍य विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. रूपेश कुमार सिंह ने किया तथा सहायक प्रोफेसर डॉ. कोमल कुमार परदेशी ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्‍ज्‍वलन, कबीर के फोटो पर माल्‍यार्पण से किया गया तथा विश्‍वविद्यालय के कुलगीत का गायन हुआ। समापन राष्‍ट्रगान से किया गया। इस अवसर पर डॉ. अशोकनाथ त्रिपाठी, डॉ. सूर्यप्रकाश पाण्‍डेय, डॉ. जगदीश नारायण तिवारी, डॉ. संदीप सपकाले, डॉ. मीरा निचळे, डॉ. शैलेश कदम आदि सहित शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी सख्‍या में उपस्थित रहे।


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